मनमोहन की दो टूक पर पाक तिलमिलाया
Tue, Jan 06, 2009 at 20:10 , Updated at Tue, Jan 06, 2009 दुनिया सेक्शन
टैग: Pakistan, Denied, Allegations | 0 कमेंट्स
इस्लामाबाद। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान के बाद खुद को चारों ओर से घिरा देख पाकिस्तान ने 'आक्रमण ही सुरक्षा है' की नीति अपना ली है। पाकिस्तानी सरकार का हर एक महकमा सफाई देने में जुट गया है।
मुंबई हमले में पाकिस्तानी हाथ के जो सबूत भारत ने सौंपे हैं, वो भी उसने चौबीस घंटे के भीतर ही नकार दिए। यही नहीं, पाकिस्तान ने भारत पर जंग का माहौल बनाने का आरोप भी लगा दिया है। पाक अब भी मुंबई हमलों के सबूतों पर अंधा और बहरा बना हुआ है।
-उसे मुंबई हमलों के दौरान सैटेलाइट फोन पर आतंकवादियों के साथ लाहौर में बैठे आकाओं से की गई बातचीत सुनाई नहीं दे रही है।
संबंधित खबरें
-उसे हमलों के बाद गिरफ्तार इकलौते जिंदा आतंकवादी अजमल कसाब का कबूलनामा भी फर्जी नजर आ रहा है। पाकिस्तान में रहने वाले उसके मां-बाप की पहचान पर भी उसने आंखें मूंद ली हैं।
लेकिन जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दोटूक बयान दिया कि पाकिस्तान दुनिया भर में आतंकवाद फैलाता है तो पाकिस्तान के कान गर्म हो गए। आनन-फानन में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी और सेना प्रमुखों की बैठक बुलाकर मीटिंग ली। और इसके बाद प्रधानमंत्री गिलानी के सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद अली दुर्रानी ने बयान दागा-भारत के प्रधानमंत्री का बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। दोनों देशों को एक दूसरे पर दोषारोपण से बचना चाहिए।
उसी वक्त भारत के खिलाफ एक साथ कई मोर्चों से बयानबाजी शुरू हो गई। पाक विदेश सचिव सलमान बशीर बोले कि भारत पूरे इलाके को जंग में झोंकने की कोशिश में है। भारतीय प्रधानमंत्री के बयान ने हालात और तंज कर दिए हैं। वहीं पाक विदेश सचिव सलमान बशीर ने भारत की ओर से भेजे गए सबूतों को हवा में उड़ा दिया और कहा कि - भारत ने पाकिस्तान को मुंबई हमलों से जुड़े कोई सबूत नहीं दिए हैं, हां कुछ जानकारियां जरूर भेजी गई हैं जिनमें दम नहीं है। ये जानकारियां भरोसेमंद नहीं लगतीं।
पाकिस्तान की संसद में भी मनमोहन सिंह के बयान की गूंज सुनाई पड़ी। पाक विदेश राज्य मंत्री मलिक अहमद खान ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर पाकिस्तान को अलग-थलग करना चाहता है। उसने जो सबूत दिए हैं वो अधूरे हैं और उनपर भरोसा नहीं किया जा सकता। दरअसल पहली बार पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर बुरी तरह घिरा नजर आ रहा है। उसपर आतंकवादी गुटों के खिलाफ कार्रवाई का भारी दबाव है। लेकिन उसने भारत के सबूतों को गंभीरता से नहीं लेते हुए फिर ये साबित कर दिया है कि आतंकवाद को अपनी जमीन से उखाड़ फेंकने पर वो कितना गंभीर है। दबाव के बीच बयान और बयानों में कभी राजनीति तो कभी कूटनीति। कब खत्म होगा ये सिलसिला।






























