नर्क में जीने को मजबूर हैं भलस्वा के लोग
नई दिल्ली। दिल्ली में तमाम ऐतिहासिक जगहें आपने देखी होंगी लेकिन दिल्ली में एक नर्क भी है जिसे खुद सरकार ने बसाया है। इस नर्क का नाम है भलस्वा।
शहर की आबादी से 25 किलोमीटर दूर भलस्वा में करीब 28000 लोग रहते हैं। साल 2000 में दिल्ली में जगह-जगह बनी झुग्गियों को तोड़ा गया और उसमें रहने वालों को भलस्वा में बसने के लिये ज़मीन दी गयी। तब वायदा किया गया था कि यहां रहने वालों को बुनियादी सुविधाएं सरकार मुहैया कराएगी। लेकिन आज आठ साल बाद आलम ये है कि यहां पीने का पानी तक मयस्सर नहीं है। पीने का पानी तो बड़ी चीज़ है यहां का पानी तो किसी भी तरह इस्तेमाल के क़ाबिल नहीं। न इंसानों के लिये, न जानवरों को लिये।
दरअसल भलस्वा में बरसों से दिल्ली का लाखों टन कूड़ा डंप किया जाता रहा है। इस लैंडफिल से रिसने वाला ज़हरीला कीचड़ धीरे-धीरे भूजल को इतना प्रदूषित कर चुका है कि अब पानी ज़हरीला हो गया है। चूंकि दूर दूर पानी का कोई साफ़ स्रोत नहीं है इसलिये मजबूरी में भलस्वा के लोग इसी ज़मीन के नीचे के पानी को इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं।
सिटीजन जर्नलिस्ट पुष्पा को अफ़सोस है इस बात का कि सरकार और जनप्रतिनिधियों से लगातार अपील करने के बावजूद पीने का पानी तो क्या यहां की ज़मीन तक समतल करने की कोशिश नहीं हुई।
जगह-जगह गड्ढे हैं जिनमें बारिश का गन्दा पानी जमा हो जाता है। जिससे सारे इलाके में मच्छरों की भरमार है। भलस्वा बस्ती की एक और बड़ी समस्या है और वो है यहां सीवेज लाइन न होना। इसके अभाव में लोगों को खुले में शौच करना पड़ता है। जिससे सारे इलके में बदबू बनी रहती है।
यहां की हालत पुष्पा को बहुत बेचैन करती थी इसलिये उन्होंने संघर्ष करने का फैसला किया। पुष्पा ने यहां की महिलाओं को इकट्ठा कर एक मंच बनाया और अपना संघर्ष शुरू किया। इन लोगों ने एमसीडी और जल बोर्ड अधिकारियों को पचासों प्रार्थना पत्र दिये। कई बार धरने दिये, प्रदर्शन किये लेकिन वो आज तक इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं।





























