पक्षियों के बसेरे को बचाना चाहते हैं गुलदेव

TimeMon, Dec 22, 2008 at 15:50 सिटिज़न जर्नलिस्ट सेक्शन

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गुलदेव राज जम्मू के एक गांव में मौजूद पक्षियों के एक बसेरे को बचाना चाहते है।

गुलदेव राज जम्मू के एक गांव में मौजूद पक्षियों के एक बसेरे को बचाना चाहते है।

    

जम्मू। गुलदेव राज जो पेशे से एक फोटोग्राफर हैं। इनकी कोशिश है कि जम्मू के एक गांव में मौजूद पक्षियों के एक बसेरे को बचाना।

घराना के वेटलैंड में हर साल हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, चीन, साईवेरिया,रूस और डेनमार्क जैसे देशों के पक्षी शामिल हैं। लेकिन ये पक्षी जिस वैटलैंड को अपना बसेरा बनाते हैं वो तेजी से खत्म हो रहा है। ये न सिर्फ यहां कि जलवायु के लिए खतरनाक है बल्कि पक्षियों के लिए भी मुश्किल पैदा कर रहा है।

वेटलैंड तालाब या झील की वो जमीन है जो जंगल की आबादी और पक्षियों के लिए बसेरे का काम करती है। वेटलैंड्स भूमिगत जल को बढ़ाते हैं और इकोसिस्टम के लिए जरूरी हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो घराना गांव का ये वेटलैंड कभी 150 एकड़ में फैला था। लेकिन गांव बसते गए और वेटलैंड की जमीन खेतों में बदल गई। ये वेटलैंड अब सिमट कर 5 एकड़ में रह गया है।

जो किसान अब अपनी रोजी-रोटी के लिए इन खेतों पर निर्भर हैं उनकी भी अपनी समस्या है। हर साल आने वाले पक्षी खेतों की फसल चट कर जाते हैं। इससे बचने के लिए गांववाले अक्सर पक्षियों को मार देते हैं। किसानों की मांग है कि सरकार उन्हें जमीन का मुआवजा दे और इलाके का विकास करे। लेकिन ये समस्या सिर्फ एक वेटलैंड की नहीं।

भारत में 50 हेक्टेयर से ज्यादा माप वाले कुल 1275 वेटलैंड्स मौजूद हैं। लेकिन ज्यादातर तेजी से खत्म हो रहे हैं। वजह कई हैं। वेटलैंड्स की जमीन बेहद उपाजाऊ होती है। यही वजह है कि इस जमीन पर कव्जा कर इसे खेतों में बदल दिया जाता है। इन इलाकों में होने वाली मानव गतिविधियां यहां की इकोलॉजी को खत्म कर देती हैं। भूमिगत जल प्रदूषण भी एक बड़ा खतरा है। रसायनों की वजह से झील और तालाबों पर जंगली वनस्पती उग जाती है और धीरे-धीरे वेटलैंड सूख जाता हैं।

हेक्टेयर से कम माप वाले वेटलैंड्स का कोई सरकारी रिकार्ड न होना भी एक बड़ी समस्या है। जो वेटलैंड्स सूची में दर्ज ही नहीं उनके संरक्षण का काम कौन करेगा।

गुलदेव राज नहीं चाहते कि पक्षियों का एक और बसेरा खत्म हो जाए। इसलिए इन्होंने इलाके में जागरुकता की मुहिम छेड़ी। इन्होंने गांववालों में इन पक्षियों के प्रति लगाव पैदा करने की कोशिश की। चित्रों के जरिए उन्हें पक्षियों की अहमियत के बारे में बसाया। उन्हें खुशी है कि लोगों पर इसका असर हुआ है।

इस वेटलैंड के विकास के लिए गुलदेव राज ने वन्य जीव विभाग के भी कई चक्कर लगाए। गुलदेव चाहते हैं कि पक्षियों का ये बसेरा सुरक्षित रहे और देश-विदेश से आने वाले ये पक्षी इलाके की खूबसूरती वढ़ाते रहें। अधिकारियों ने वेटलैंड संरक्षण को लेकर कुछ कदम उठाए हैं।

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