बीजेपी और जेडीयू में खुलेआम तू-तू-मैं-मैं

TimeWed, Dec 17, 2008 at 20:26 , Updated at Wed, Dec 17, 2008 देश सेक्शन

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दरअसल बीजपी को दिक्कत नीतीश कुमार से है लेकिन वो उन पर सीधे हल्ला नहीं बोलना चाहती।

दरअसल बीजपी को दिक्कत नीतीश कुमार से है लेकिन वो उन पर सीधे हल्ला नहीं बोलना चाहती।

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नई दिल्ली। बीजेपी और उसके सबसे भरोसेमंद सहयोगी जेडीयू में ठन गई है। आलम ये है कि बीजेपी नीतीश कुमार को याद दिला रही है कि ज्यादा घमंड ठीक नहीं। उनकी सरकार बीजेपी के दम पर ही टिकी है, तो जेडीयू ताल ठोक कर कह रही है कि बीजेपी से जो बन पड़ता हो कर ले, नीतीश सरकार अपनी शर्तों पर काम कर रही है और करेगी। बिहार में एनडीए सरकार के कार्यकाल में अभी दो साल बाकी है, लेकिन बीजेपी और जेडीयू में खुलेआम तू-तू-मैं-मैं शुरू हो गयी है।

इस लड़ाई की शुरुआत हुई हाल के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद। जेडीयू ने बीजेपी को सलाह दे डाली कि वो आतंकवाद का मुद्दा छोड़कर नीतीश सरकार के मॉडल पर लोकसभा चुनावों में वोट मांगे। बस! बीजेपी को बुरा लग गया। उसने तुरंत याद दिलाया कि नीतीश सरकार बीजेपी के पचपन विधायकों के दम पर टिकी है।

पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी कहते हैं कि इस प्रकार का अहंकार जताना मैं समझता हूं कि मुख्यमंत्री को इससे नुकसान होगा। दरअसल बीजपी को दिक्कत नीतीश कुमार से है। लेकिन वो उन पर सीधे हल्ला नहीं बोलना चाहती।

पार्टी को लग रहा है कि मुख्यमंत्री तानाशाह की तरह व्यवहार करते हैं और बीजेपी अपने ही राज में हाशिये पर जाती दिख रही है। लेकिन जेडीयू अपने ऊपर लगे सारे आरोपों को गलत बताते हुये उल्टा बीजेपी को ही सीख दे रही है। जेडीयू कहती है कि वो नरेंद्र मोदी मॉडल कह सकते हैं तो हम नीतीश मॉडल क्यों नहीं कह सकते। ये तो अलोकतांत्रिक है।

दरअसल नीतीश कुमार और बीजेपी में अंदर ही अंदर अन बन तब शुरू हुई जब हरियाणा में हुई एनडीए की रैली का नीतीश कुमार ने बहिष्कार कर दिया था, क्योंकि उस मंच पर शिवसेना को भी होना था। माना जा रहा है कि आडवाणी को ये बात खल गई और उसके बाद पार्टी ने नीतीश सरकार पर लगाम कसने का फरमान जारी कर दिया।

पोस्टे बी Brij Kumar

नीतीश जी और आडवाणी जी मे ज़मीन-आसमान का अंतर है. नीतीश ज़मीन पर चलने बाले एक आम आदमी है जबकि

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