पुलिस अंकल गुस्साए, बच्चों ने 7 घंटे ठंड में बिताए
Wed, Nov 19, 2008 at 09:49 , Updated at Wed, Nov 19, 2008 सिटी खबरें सेक्शन
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लखनऊ। लखनऊ पुलिस की दादागिरी ने दर्जन भर मासूमों को बेहाल कर दिया। बच्चे घर से तो पिकनिक मनाने के लिए निकले थे। लेकिन बेरहम लखनऊ पुलिस की वजह से पिकनिक मनाना दूर पूरे सात घंटे बच्चों ने भूखे-प्यासे थाने के बाहर बिताए और फिर लखनऊ से बहराइच लौट गए।
बच्चों को जब बस से उतर कर लखनऊ स्थित हजरतगंज थाने के पास बैठने को कहा गया तो बच्चों को उम्मीद थी कि शायद पुलिस अंकल का गुस्सा ठंडा हो जाएगा और उन्हें पिकनिक मनाने के लिए छोड़ दिया जाएगा। लेकिन इस कड़कड़ाती ठंड में सभी बच्चों को पूरे सात घंटे थाने के बाहर बिताने पड़े।बस का ड्राइवर का कहना है कि उसके साथ थाने में मारपीट की गई।
दरअसल बहराइच के राम खेलावन हायर सेकेंड्री स्कूल की बस पिकनिक मनाने के लिए बच्चों को लेकर लखनऊ जा रही थी। बच्चों से भरी बस लखनऊ के एडीजी बृजलाल की कार से टकराई गई। जिससे एडीजी साहब को गुस्सा आ गया और बच्चों को पिकनिक स्पॉट के बदले थाने में बिताने पड़े।
पुलिसवालों का कहना है कि बस ड्राइवर ने बड़ी गलती की है। उसकी सजा उसे मिली। आनन-फानन में बस को थाने में खड़ा करवा दिया गया। ड्राइवर को थाने के अंदर बंद कर दिया गया और बच्चों को पास के पार्क में बैठा दिया गया। दरअसल बच्चे बहराइच से लखनऊ चिड़ियाघर देखने आए थे।
बच्चों के साथ जा रही स्कूल की टीचर का कहना है कि बस से हमलोग लखनऊ जा रहे थे। पीछे किसी नेता की गाड़ी से टक्कर लग गयी। टक्कर मामूली थी। लेकिन दोपहर से रात हो गई है पर अभी तक मामला नहीं सुलझ पाया है।
पार्क में बैठे-बैठे बच्चे भूख के मारे बदहवास होने लगे। धीरे धीरे खबर फैली और मीडिया की टीमें थाने पहुंचने लगी। तब जाकर पुलिस को समझ में आई कि कहीं बड़े साहब के चक्कर में बात न बिगड़ जाए। आनन-फानन में रात साढे़ 10 बजे पुलिस ने बच्चों की गाड़ी वापस कर दी और ड्राइवर को छोड़ दिया। बच्चे बिना पिकनिक मनाए ही अपने घर वापस लौटे गए। बच्चे इस घटना को जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।
एजीडी बृजलाल का कहना है कि उन्होंने पुलिस को किसी प्रकार का आदेश नहीं दिया। साथ ही उन्होंने इंकार किया कि बस ड्राइवर के साथ मारपीट किया गया है। उन्होंने सारे आरोपों को झूठ बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कोई गलती नहीं की है।
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पोलिसे का येह वव्हार बिल्कुल की ग़लत हैं और इस क उन्हे सज़ा देनी चाहिए. सज़ा मिलनी चाहिए, मैं येह
इसको कहते हैं तिल का ताड़ बनाना या बात का बतंगड़ करना. आख़िर बात बस इतनी सी ही तो है.



























पोस्टे बी Harendra Singh
जिस दिन भारत देश की पुलिस महकमा-अधिकारी और राजनेता सुधर जाएगें उस दिन देश का आतंकवाद ख़त्म हो जाएगा ये
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