रामाश्रय की मुहिम से सुधर गई सड़क

नई दिल्ली। Right To Information ने आम आदमी को जानकारी मांगने का हक दिया है। ये एक ऐसा अधिकार है जो बहुत से लोगों के लिए सरकारी कामों की खामियां और अनियमितताएं उजागर करने में मददगार साबित हो रहा है। सिटीज़न जर्नलिस्ट रामाश्रय ने अपने इलाके की बदहाल सड़कों को दुरुस्त करने के लिए भी RTI का इस्तेमाल किया।
अप्रैल 2008 तक सुन्दर नगरी की सड़क की हालत काफी बदहाल थी। टूटी-फूटी सड़क को बनाने का काम जब शुरू हुआ तो रामाश्रय ने देखा कि सड़क बनाने के लिए पत्थर के टुकड़ों की जगह ईंट के टुकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस घपले के बारे में जानने के लिए इन्होंने 19 मार्च 2008 को एक RTI डाली। जिसमें रामाश्रय सबसे पहले ये जानना चाहते थे कि ये सड़क 5 साल में कितनी बार बनी है और इस पर कुल खर्चा कितना हो रहा है।
RTI का जो जवाब आया उससे पता चला कि पिछले 5 साल में ये पहली बार है जब ये सड़क बनायी जा रही है। और इस मरम्मत का कुल खर्च तकरीबन साढ़े तीन लाख रुपये बताया गया। रामाश्रय के RTI डालने की वजह से जब मसला सामने आया तो अधिकारियों ने घबराकर मरम्मत में इस्तेमाल की जा रही ईंटों का खर्च उस एस्टिमेट में डाला ही नहीं।
सड़क को बने एक हफ्ता भी नहीं हुआ था कि रोड टूटनी शुरू हो गई और एमसीडी की पोल खुल गई। फिर रामाश्रय ने 25 अप्रैल 2008 को दूसरी आरटीआई डाली। जिसमें उन्होंने ये सवाल खड़ा किया कि आखिर एक हफ्ते पहली बनी सड़क के टूटने के क्या कारण हैं। दूसरी आरटीआई का उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। लेकिन उसका असर ये हुआ कि जगह-जगह टूटी हुई रोड की मरम्मत कर दी गई। लेकिन कुछ दिनों के बाद सड़क फिर से टूटना शुरू हो गई।
सड़क की मरम्मत के संबंध में रामाश्रय ने 21 मई को तीसरी आरटीआई डाली जिसमें उनका सवाल था कि आखिर किसके कहने पर सड़क की मरम्मत करवायी गई और इसे बनाने के लिए किस मैटीरियल का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन उनकी तीसरी RTI का भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इस बीच एमसीडी के जूनियर इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और काउंसलर के फोन आने शुरू हो गए। जिन्होंने रामाश्रय को आरटीआई को रद करने को कहा। वो उनसे इरादे जानना चाहते थे और उनकी जानकारी हासिल करने के मकसद पर ही सवाल खड़े कर रहे थे।
मगर रामाश्रय का मकसद किसी भी हाल में इस सड़क को ठीक करवाना था। आरटीआई से घबराए एमसीडी अधिकारियों ने जल्द से जल्द इस सड़क को ठीक कराने का वादा किया और मई 2008 में उसी खर्चे में तीसरी बार फिर ये सड़क बन कर तैयार हो गई। इस सड़क का जब रामाश्रय ने मुआयना किया तो पाया कि ये सड़क बिल्कुल सही बनी थी।



























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