बेघर महिलाओं के आश्रय के लिए लड़ रहे हैं इंदू

नई दिल्ली। दिल्ली शहर में हजारों महिलाएं शोषित होने को मजबूर हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उनके पास रात गुजारने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है। किसी को इनकी फ़िकर भी नहीं। सरकार भी इनके आश्रय की जरूरत को पूरा करने के बजाए इन्हें एक जगह से दूसरी जगह खदेड़ देती है। दिल्ली के इंदूप्रकाश सिंह इन बेसहारा औरतों के लिए आश्रयगृह के लिए लड़ रहे हैं। सिटीजन जर्नलिस्ट बन कर वो बता रहे हैं फुटपाथ पर रहने वालों की तकलीफ।
इंदूप्रकाश सिंह दिल्ली में रहते हैं। वो और उनके साथी पिछले 8 साल से उन लोगों को आश्रय दिलाने की कोशिश कर रहे हैं जो बेघर हैं और बेहद खराब और अमानवीय हालत में खुले आसमान के नीचे जीने के लिए मजबूर हैं।
दिल्ली में फुटपाथ पर रहने वालों की संख्या एक लाख से ऊपर है। सरकार ने इनके लिए एक स्कीम बनाई नाइट शेल्टर। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इस वक्त एक लाख लोगों के लिए सिर्फ 10 शेल्टर होम यानी आश्रय घर चल रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से एक भी शेल्टर होम महिलाओं के लिए नहीं है।
ऐसा नहीं है कि बेघर महिलाओं के आश्रय घर बनाये ही नहीं गए थे। दिल्ली सरकार ने महिलाओं के लिये भी नाइट शेल्टर बनवाए थे। लेकिन उनका क्या हुआ इस पर इंदू ने प्रकाश डाला।
इंदूप्रकाश ने पालिका का जायजा लिया और बताया कि यहां पर एक इमारत है जो महिलाओं के लिए एकमात्र शेल्टर होम हुआ करता था जो कि आज एनडीएमसी का स्टाफ हाउसिंग कॉम्पलेक्स है। 2004 में जब बेघर महिलाओं को यहां से निकाला गया उस वक्त अधिकारियों ने ये भी नहीं सोचा कि आखिर ये महिलाएं जायेंगी कहां।
शेल्टर होम बंद करने के खिलाफ इंदू और उनके साथियों ने आवाज उठाई। सरकार के दबाव में कुछ महीने बाद यमुना पुश्ता पर महिलाओं के लिए दूसरा नाइट शेल्टर खोला गया।
यमुना पुश्ता में 2004 में महिलाओं के लिए आश्रय बना था। 2007 में इसे बंद कर दिया गया। अधिकारियों से पूछे जाने पर ये पता चला कि इस जगह को वो गोदाम के लिए इस्तेमाल कर रहे थे।
दिल्ली में लगभग 10,000 महिलाएं बेघर हैं। छत तो दूर इनके लिये पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतों की व्यवस्था नहीं है।
नेशनल कमीशन फॉर विमेन के एक सर्वे के मुताबिक ऐसी करीब 96.5 प्रतिशत महिलाओं के साथ शारीरिक-मानसिक शोषण हुआ है। शोषकों में सरकारी कर्मचारी और कानून के रखवाले सबसे ज़्यादा थे
इंदू ने महिलाओं के शेल्टर को लेकर मुख्यमंत्री से बात की। उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि निर्मल छाया स्कीम पहले से चल रही है। जबकि निर्मल छाया अपराधी महिलाओं के लिए जेल है न कि बेघर महिलाओं के लिए आश्रय घर।

























