वेदांती महाराजः राम-राम जपना, पराया माल अपना
IBN7/कोबरा पोस्ट
नई दिल्ली। वेदांती महाराज रामजन्मभूमि ट्रस्ट के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य हैं। नाम बड़ा, दर्शन भी बड़े। एक ओर रामजन्मभूमि ट्रस्ट तो दूसरी ओर मातृ सेवा ट्रस्ट। एक पलड़े में राजनीति तो दूसरे में कमाई। अद्भुत संगम के योग हैं ये महाराज। नाम में वेद है तो क्या हुआ, काम में तो भेद ही भेद हैं। धर्म-अधर्म के जिन्न से घिरे हुए हैं - स्वामी वेदांती महाराज। खुद ही देखिए महाराज जी के लाभ मंत्र का उच्चार।
वेदांती महाराज - कितना परसेंट देना चाहते हैं आप?
संवाददाता - जो आपका आदेश होगा, उसी हिसाब से।
वेदांती महाराज – नहीं, ऐसा नहीं है। आप कितना देना चाहेंगे, आप बताइए। जैसे मान लीजिए आपने पांच करोड़ दिया। उस पांच करोड़ में आप कितना देना चाहेंगे?
(वेदांती महाराज के मुंह से पांच करोड़ रुपए का उच्चारण अटपटा लगा होगा आपको। यकीन मानिए हमें भी लगा। हमें खबर मिली थी कि लाखों लोगों की भक्ति के प्रतीक वेदांती महाराज का एक और चेहरा भी है। वो चेहरा जो लक्ष्मी का उपासक है, वो चेहरा जो काले पैसे को धर्म की कुटिया में सफेद कर रहा है। हमें इस खबर पर यकीन न हुआ। आखिर वेद पुराण बांचने वाला, अयोध्या में बढ़-चढ़ कर भक्ति और राजनीति का मेल करने वाला ऐसा कैसे हो सकता है। लेकिन प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या जरूरत।)
संवाददाता - सत्तर परसेंट। यदि हम चेक से पेमेंट करते हैं तो।
वेदांती महाराज - यानी सत्तर परसेंट।
संवाददाता - जी हां। सत्तर परसेंट।
वेदांती महाराज - सत्तर माने कितना हुआ?
संवाददाता - तीन करोड़ पचास लाख।
वेदांती महाराज - पांच करोड़ में ?
संवाददाता - तीन करोड़ पचास लाख।
बाबा - तीन करोड़ पचास लाख माने सत्तर परसेंट आप ले जाएंगे?
संवाददाता – जी।
(मुमकिन है मोलभाव की ये भाषा आपके पल्ले न पड़े, सो हम बता दें कि वेदांती महाराज के दर्शन करने हम विश्व हिंदू महासम्मेलन इलाहाबाद पहुंचे। हमने बड़े कॉर्पोरेट घरानों के एजेंट का चोला पहना। वो घराने जो अपनी काली कमाई इनकम टैक्स विभाग से बचाना चाह रहे हैं। बात सीधी और सपाट थी - हम स्वामी जी के मातृसेवा ट्रस्ट को अगर पांच करोड़ की काली कमाई देते हैं तो ट्रस्ट कितना कमीशन काट कर वो व्हाइट मनी के तौर पर हमें वापस करेगा। सो स्वामी वेदांती महाराज कैलकुलेशन में लग गए। दिमाग में काफी देर नफे-नुकसान और इस काले धंधे के खतरे का विश्लेण करते रहे।)
वेदांती महाराज - उसमें हमको कितना मिलेगा?
बाबा का चेला - डेढ़ करोड़।
वेदांती महाराज - ऐसा क्यों नहीं करते आप कि जैसे पांच करोड़ दे रहे हैं तो तीन करोड़ ले लीजिए, दो करोड़ हमको दे दीजिए।
संवाददाता - नहीं स्वामीजी, हमें अपना थोड़ा मार्जिन रखकर चलना होता है।
वेदांती महाराज - डिस्काउंट देना होता होगा। चलिए ठीक है।
संवाददाता – जी।
वेदांती महाराज - एक राउंड में इस तरह से हो जाएगा। फिर बाद में?
संवाददाता - देखिए हमारे पास सात-आठ कंपनियां हैं।
वेदांती महाराज - हमको पैसा लौटाने में कोई आपत्ति नहीं है। आप जिस डेट में कहिएगा हम उस डेट में पैसा लौटा देंगे।
संवाददाता – जी।
वेदांती महाराज - चूंकि हमारा निजी ट्रस्ट है। किसी से सलाह तो लेना नहीं है। किसी से पूछना नहीं है। हमको जो हमारा सीए है उससे बात करनी पड़ेगी कि कैसे दर्शाएगा वो।
(वेदांती महाराज अपने निजी ट्रस्ट के बलबूते क्या कुछ काम करते हैं ये अब साफ हो चुका था। पक्की बात थी कि काले पैसों के धनी लोगों के लिए वेदांती महाराज बड़े काम के बाबा हैं। उनका पैसा सफेद जो कर देते हैं। हमारा सौदा आखिर तीस फीसदी यानी डेढ़ करोड़ पर तय हुआ। स्वामी वेदांती महाराज ने हमें भरोसा दिलाया कि बचे हुए तीन करोड़ रुपये मातृ सेवा ट्रस्ट और उसके अधीन चलने वाले स्कूलों के फर्जी बिल के जरिए हमें वापस कर दिए जाएंगे।)
संवाददाता - हमारा मोटिव ये है कि टैक्स डिपार्टमेंट में सारा पैसा होता है। सरकार के बैंक में जाए पैसा उससे कोई फायदा नहीं है। धर्म के कार्यों में यूज होगा सारा पैसा। कंपनियां भी यही चाहती हैं।
वेदांती महाराज - ठीक है।
संवाददाता - आपका कोई छोटा-मोटा ट्रस्ट तो है नहीं। ऑलरेडी एस्टेब्लिश्ड है।
बाबा का चेला - वहां दिखा देंगे। विद्यालय वाले में दिखा देंगे हो जाएगा काम कंपलीट।
वेदांती महाराज - हां ठीक है।
बाबा का चेला -विद्यालय तो कई सारे हैं न।
वेदांती महाराज - ये विद्यालय है मेरे नाम से।
बाबा का चेला - एक नहीं, दो हैं।
संवाददाता – जी-जी।
बाबा का चेला - महाविद्यालय है, निशुल्क शिक्षा दी जाती है। निशुल्क शिक्षा व्यवस्था है, विकलांगों के लिए है।
वेदांती महाराज - आप ऐसा करें कि 14 और 20 मार्च के बीच में आ जाइए।
संवाददाता – जी।
वेदांती महाराज - अयोध्या हमारे रहने तक आ जाइए। वहां पर हम हैं, तो उसी बीच सारा काम हो जाएगा।
(लेकिन अब भी एक सच सामने आना बाकी था, हमें स्वामी वेदांती महाराज के मातृ सेवा ट्रस्ट की असलियत जाननी थी। सो हमने फिर जाल डाला - पूछा कि अगर हम ये काला पैसा रामजन्म भूमि ट्रस्ट में दे दें तो - आखिर स्वामी जी इस ट्रस्ट के चेयरमैन जो हैं।)
संवाददाता - स्वामीजी आप रामजन्म भूमि के चेयरमैन हैं?
वेदांती महाराज -हां, जी हां, ऐसा है उस पैसे को यदि हम रामजन्मभूमि में डाल देंगे तो आपको नहीं मिलेगा।
संवाददाता - बिल्कुल ठीक।
बाबा का चेला - एक चवन्नी भी नहीं। देने से पहले उसमें हिसाब बिल-वाउचर देना पड़ता है।
वेदांती महाराज - इसलिए वो अंतरराष्ट्रीय है। उसमें आईबी और सीबीआई इन्वॉल्व है।
संवाददाता - आपके वाले में तो कोई दिक्कत नहीं है?
वेदांती महाराज – नहीं-नहीं।
वेदांती महाराज - वो तो इसलिए बनाया ही गया है। हमारा वाला वो अलग है।
(सच सामने आ चुका था, हाथी के खाने के और दिखाने के दांत अलग-अलग थे। वेदांती महाराज धर्म की अपनी दुकान रामजन्मभूमि ट्रस्ट से चलाते हैं और काली कमाई से अपनी जेब गर्म करने के लिए उन्होंने खोल रखा है मातृ सेवा ट्रस्ट। वैसे मातृ सेवा ट्रस्ट के नाम पर स्कूल जरूर चलते हैं। विकलांग बच्चों को सहायता भी दी जाती है। लेकिन कहीं न कहीं उसमें अपने हितों की सेवा का लालच भी जुड़ा है। जय हो - बाबा वेदांती महाराज।)


























