प्रज्ञानंद ने मांगा 5 करोड़ का कमीशन
Mon, Aug 18, 2008 at 23:08 , Updated at Mon, Aug 18, 2008 देश सेक्शन
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IBN7/ कोबरा पोस्ट
नई दिल्ली। क्या मेरा क्या तेरा सब ईश्वर का - उसके नाम का खाते हैं, उसके नाम का पहनते हैं, उसे ही मानते हैं, उसे ही ओढ़ते हैं।
कुछ ऐसे ही शब्द आप रोज स्वामी प्रज्ञानंद महाराजसे सुनते होंगे। कभी टीवी पर प्रवचन तो कभी साक्षात। लेकिन स्वामी जी का एक प्रवचन आपने शायद ही कभी सुना हो। ये प्रवचन कहता है-
-कैश में दे दो कोई दिक्कत नहीं है।
-90 रख लो, दस दे दो - ये नहीं चलेगा।
-दस-दस करोड़ के पांच फंड आने वाले हैं।
-कोशिश तो करो यार, तुमको भी तो पुण्य मिलेगा।
ये लाभ का प्रवचन है, असली जिंदगी का प्रवचन। वो तो टीवी का प्रवचन था, वो तो पब्लिक के लिए था, लेकिन ये काला बाजारियों के लिए है, उनके लिए जो सिक्कों में खेलते हैं।
प्रज्ञा महिला मिशन, प्रज्ञा साईं कल्याण और विश्व मातृ प्रकोष्ठ के कर्ताधर्ता और लाखों लोगों को मोक्ष की राह बताने वाले स्वामी प्रज्ञानंद महाराज लगता है खुद ही उस रास्ते से भटक गए हैं। जो संस्थाएं उन्होंने लोगों की भलाई के लिए बनाई थीं वहां अब करोड़ों की टैक्स चोरी और हेराफेरी के अड्डे खुल गए हैं।
हमारे खुफिया कैमरे से स्वामी प्रज्ञानंद की मुलाकात हुई दिल्ली के उनके आश्रम में। हम पहुंचे टैक्स बचाने की कोशिश में लगे बड़े कॉरपोरेट घरानों के दलाल बनकर। महाराज की भाषा बेहद सधी हुई थी, राज की परतें खुलने में थोड़ा वक्त लगा।
संवाददाता - स्वामीजी हमारा ये था कि छह-सात हमारे पास कॉरपोरेट कंपनियां हैं। 31 मार्च रिटर्न फाइल करने की डेट नजदीक आ रही है तो वो जल्दी से जल्दी चाह रही थीं कि अपना फंड किसी ऐसे ट्रस्ट में इन्वेस्ट कर दें जहां उनका पैसा भी सेफ रहे। उनका पैसा भी न डूबे और कुछ पैसे रखकर वो लोग मतलब ट्रस्ट के चेयरमैन वगैराह पैसा लौटा दें, तो क्या ऐसा हो सकता है।
स्वामी प्रज्ञानंद - ऐसा नहीं हो सकता इसलिए कि हमारे पास बहुत ऑफर आए। 50 फीसदी तक के ऑफर आए हैं लेकिन हमने मना कर दिया। आप तो कहोगे कि 90 दे दो, 10 रख लो वो हमको नहीं चलेगा। हम कहां शो करेंगे, क्योंकि हमें जो भी पैसे दोगे, वो तो चेक से दोगे और चेक से दोगे तो चेक से जमा करेंगे हम। रसीद देंगे आपको। अब रसीद देने के बाद उस पैसे को हाऊ कैन आई शो।
काला पैसा चेक से लेने में घबरा रहे हैं स्वामी प्रज्ञानंद। उन्हें ये चिंता सता रही है कि कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए - लेकिन गड़बड़ी तो हो चुकी थी। स्वामी का लालच मंत्र खुफिया कैमरे में लगातार कैद होता जा रहा था। हम चाहते थे कि सौदा कुछ इस तरह से हो कि कमीशन की दस फीसदी रकम रखने के बाद वो बाकी का नब्बे फीसदी लौटा दें। ताकि काली कमाई का एक मोटा हिस्सा सफेद हो सके और कानून को भनक तक न लगे। फिर क्या था - माहौल में सिक्के बरसने लगे, स्वामी जी खुद ही कानून की आंखों में धूल झोंकने के तरीके गिनाने लगे।
संवाददाता - स्वामीजी हम पैसे कैश में भी दे सकते हैं।
स्वामी प्रज्ञानंद - हां कैश में दे दो तो कोई दिक्कत नहीं है।
संवाददाता - हम कैश में दे दें और आप जो भी परसेंटेज हो वो चेक में लौटा दें।
स्वामी प्रज्ञानंद - वो कैसे करेंगे हम। किस रूप में करेंगे। कोई कंस्ट्रक्शन कंपनी हो कुछ हो....।
संवाददाता - हां वो सब मिल जाएगा।
स्वामी प्रज्ञानंद - वो तरीका हमें भी बता दो आप।
संवाददाता - नहीं आपका जो भी प्रोसिजर हो हमें बता दो थोड़ा सा। फिर मैं आपको ऑफर दे दूंगा कि भई ये ऑफर हो सकता है हमारे लिए।
स्वामी प्रज्ञानंद - हां तो मतलब हमारा पैसा कंस्ट्रक्शन में खर्च होगा। या तो बिल्डिंग बन रही है, मंदिर बन रहा है या कुछ वहां हमारा स्कूल बन रहा है, कॉलेज बनाने की सोच रहे हैं, तो इन चीजों में हो सकता है तो उसको आप कैसे शो करेंगे हमें। आप अपने सीए से बात कर लो और हम भी अपने सीए से बात करके देखेंगे। हमें फंड मिलने वाला है। दस-दस करोड़ के हमें पांच फंड मिलने वाले हैं। वो प्रभावित हो गए हैं हमसे। हम दूसरों को दे देंगे पचास परसेंट। पचास-पचास की बात हो गई है।
देखा आपने इस संत की जुबान पर लालच डोल रहा है। स्वामी प्रज्ञानंद ने ये खुलासा कर दिया कि कई बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों से उनका फिफ्टी-फिफ्टी में सौदा हुआ है। वो जितनी काली कमाई का दान इनके चरणों में अर्पित करते हैं, उसका आधा ये व्हाइट मनी के तौर पर चेक से वापस कर देते हैं और आधा खुद डकार जाते हैं। लालच की ये रेखा खिंचती जा रही थी, जैसे ही हमने स्वामी प्रज्ञानंद से ये कहा कि एक बड़ी कंपनी दस करोड़ की काली कमाई उनके ट्रस्ट के जरिये सफेद करना चाहती है। स्वामी जी की जुबान पर लक्ष्मी आ विराजीं और पुण्य का वास्ता देकर वो पांच करोड़ का कमीशन मांगने लगे। साफ था, संत की सेवा करो, उसकी मुट्ठी गर्म रखो और फ्री में पुण्य कमाओ।
संवाददाता - मुझे सिर्फ ओके करना है आपकी तरफ से कि आप कितनी उम्मीद करते हो तो फिर मैं उसी हिसाब से फाइनल कर दूंगा।
स्वामी प्रज्ञानंद - उनसे कहो पचास-पचास।
संवाददाता - नहीं स्वामीजी देखिए पचास तो फिर...।
स्वामी प्रज्ञानंद - कोशिश तो करो यार। तुमको भी तो पुण्य मिलेगा बेटा। इन कन्याओं के आशीर्वाद के अधिकारी बनोगे। इनका आशीर्वाद मिलेगा तो कहां से कहां पहुंच जाओगे। वो तो सेठ लोग हैं। तुम जो बीच में हो पर न तुम्हें ज्यादा फायदा मिलने वाला है। जो तुम्हें फायदा होगा इनकी दुआएं निकलेंगी इसकी आप कल्पना नहीं कर सकते हो।
संवाददाता - तो फिर आपको देकर क्या फायदा। 33 परसेंट हम सरकार को न दे दें।
हमारा इतना बोलना था कि स्वामी प्रज्ञानंद महाराज का डिब्बा गोल हो गया, उन्हें लग गया कि ऊंट पहाड़ के नीचे नहीं आएगा। सो एक झटके में ही उन्होंने अपना कमीशन घटाकर आधा कर दिया। कुछ न मिलने से - कुछ मिलना जो बेहतर है।
स्वामी प्रज्ञानंद - पच्चीस कर दो।
संवाददाता - पच्चीस परसेंट पर तो...तो पच्चीस परसेंट पर मैं आपकी तरफ से डन समझूं।
स्वामी प्रज्ञानंद - हमारी तरफ से डन समझिए।
डील पक्की हो गई - पुण्य का चेहरा पाप के चेहरे में बदल गया। आडंबर का खेल सामने आ गया। शगुन के तौर पर स्वामी प्रज्ञानंद ने हमसे 3001 रुपये तक लपक लिए। हमें गुरुमंत्र मिल चुका था। स्वामी प्रज्ञानंद दस करोड़ का पच्चीस फीसदी पाने के सपने संजोने लगे और हम इस काली कोठरी से बाहर निकल गए। कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। स्वामी प्रज्ञानंद ने आगे की बात पक्की करने के लिए हमें अपने सीए के पास भेजा। सीए तो स्वामी का असली चेला निकला। उनसे दो कदम आगे ही निकला। ब्लैक एंड व्हाइट का पूरा गोरखधंधा वही संभालता है और उसका नाम है जे के गुप्ता। काले धंधे के इस घालमेल की कागजी कार्रवाई के लिए उसने भी हमसे 50 लाख रुपए कमीशन मांग लिया



























पोस्टे बी rittu
पेहले लोगो को फ़साओ उनको अपना बनाओ फिर उनके बीवी बचो से छुड़ाओ फिर कहो बेटा येह पैसा किस काम
रेप्ली टू थिस कमेंट