फ्लाइट IC-814 की दास्तान

TimeThu, Aug 14, 2008 at 19:41 , Updated at Thu, Aug 14, 2008 देश सेक्शन

Tagsटैग: nt award, criminal, ic814 | 0 कमेंट्स

Email Print

      

नई दिल्ली। 24 दिसंबर, 1999, 5 हथियारबंद आतंकवादी, 178 यात्री और एक हवाई जहाज। उसकी मंजिल थी काठमांडू से नई दिल्ली। लेकिन 7 दिनों बाद भी वो नहीं पहुंचा दिल्ली। कभी खुले आकाश में, तो कभी जमीन पर वो लगाता रहा चक्कर।

पायलट चाहता था कि वो जहाज को दिल्ली ले जाए लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकता था। उसकी मर्जी अब उसके बस में नहीं थी क्योंकि उसकी मर्जी पर हावी थी बारूद की मर्जी। वो बारूद पांच लोगों के हाथ में था। 178 यात्रियों के सिर पर नाच रही थी मौत। उन्हें पता था कि इंकार करने का मतलब है मौत और सिर्फ मौत।

हाइजैकर्स को करना था एक सौदा। यात्री लो, साथी दो। सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। एक यात्री मार दिया गया। घबरा गई सरकार। छोड़ दिया तीन खतरनाक आतंकवादियों को। हो गया पूरा उनका मकसद।

आठ साल बाद मौत के उन सौदागरों के तीन मददगार पहुंच गए अपने अंजाम तक। उन्हें हुई उम्रकैद। लेकिन सरकार का मकसद पूरा नहीं हुआ। पांचों हाइजैकर्स का बाल बांका भी नहीं हुआ। वो अभी-भी हैं मस्त और सरकार है पस्त। आखिर कब खत्म होगी IC-814 की दास्तान।

पटियाला जेल में बंद अब्दुल लतीफ, दिलीप कुमार और युसुफ नेपाली को आतंकियों को सीबीआई की विशेष अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। पूरे मामले में 120 लोगों की गवाही ली गई थी। सीबीआई ने इस मामले में 10 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से सात अभी भी पकड़ से दूर हैं। जिनमें से पांच तो पाकिस्तान में बैठे हैं।

विमान अपहरण का ये मामला 24 दिसंबर 1999 का है जब इंडियन एयरलाइंस के IC 814 विमान को काठमांडू से दिल्ली आते वक्त हाईजैक कर लिया गया था। इस खतरनाक आतंकी कार्रवाई को मौलाना मसूद अजहर के भाई शाहिद अख्तर सईद और उसके चार साथियों ने अंजाम दिया था।

यात्रियों की रिहाई के बदले खतरनाक आतंकवादी जैश ए मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख को रिहा करना पड़ा। छोड़े गए सभी आतंकवादी सरहद पार बैठ कर आज भी दहशतगर्दी को अंजाम दे रहे हैं।

IC 814 ने जब उड़ान भरी तो उसमें 178 यात्री सवार थे।काठमांडू से दिल्ली की वो उड़ान कैप्टन देवी शरण के लिए एक रुटीन फ्लाइट थी। लेकिन उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही जहाज पर सवार हर इंसान की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।

सीनियर फ्लाइट स्टेवर्ड अनिल शर्मा ने बताया कि जैसे ही उन्होंने गैलरी की तरफ मुंह किया तो वहां मास्क पहने एक आदमी दिखाई दिया।चशमा पहने एक छोटे कद का आदमी। उसने कहा कोई हरकत नहीं होनी चाहिए। ये बम है उड़ाने के लिए। फ्लाइट को पश्चिम की ओर ले चलो।

हाइजैकर्स ने कैप्टन शरण से जहाज को लाहौर में उतारने के लिए कहा लेकिन जहाज़ में पर्याप्त ईंधन नहीं था। दुनिया कहीं पाकिस्तान को हाइजैकिंग की साजिश से जोड़कर न देखे, इस डर से पाकिस्तान ने हवाई जहाज़ को लाहौर हवाई अड्डे पर उतरने की इजाजत नहीं दी। कैप्टन शरण ने हाइजैकर्स से कहा कि उन्हें अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरना होगा।

कैप्टन शरण ने कहा कि अब मुझे लगने लगा कि हम यहां से नहीं उड़ेंगे। मुझे उम्मीद थी की हमें किसी तरह की मदद मिल जाएगी और हाइजैकिंग का सारा खेल अमृतसर में ही खत्म हो जाएगा।

इस बारे में भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्रा कहते हैं कि हमने अमृतसर से कहा कि तेल के बॉउसर के साथ किसी निशानेबाज़ को भेजा जाए जो जहाज के टायर को गोली मारकर बेकार कर दे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके लिए कई वजहें हो सकती हैं लेकिन किसी भी वजह की जानकारी हमें नहीं दी गई।

अमृतसर की नाकामी बहुत महंगी साबित हुई। स्थानीय फोर्स को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स का इंतजार करने को कहा गया। तेल भरने में जानबूझकर हो रही देरी से हाइजैकर्स बौखला गए। उन्होंने सभी यात्रियों को जान से मारने की धमकी दी और उनका पहला शिकार बना रूपेन कात्याल।

कैप्टन शरण ने कहा कि ATC कुछ नहीं कर रहा था। हमें कोई मदद नहीं मिल रही थी। बॉउसर जहाज़ के सामने नहीं आ रहा था। कुछ भी नहीं हो रहा था। मुझे ही कुछ फैसला लेना था।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों या सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिलती देख कैप्टन शरण बगैर ईंधन भराए हवाई जहाज़ को लाहौर ले गए।

इस बार पाकिस्तानी सरकार ने जहाज को उतरने की इजाजत दे दी लेकिन सिर्फ ईंधन भरने के लिए। इसके बाद IC 814 ने काबुल की तरफ उड़ान भरी।

लेकिन काबुल हवाई अड्डे पर हवाई जहाज को रात में उतारने की सुविधा नहीं थी इसीलिए हाइजैकर्स हवाई जहाज को दुबई ले गए।

दुबई में कुछ यात्रियों को आजाद कर दिया गया और रूपेन कात्यल की लाश को बाहर फेंक दिया गया। 162 यात्रियों और चालक दल के साथ IC 814 के पहियों ने कंधार हवाई अड्डे की पट्टी को छुआ। अब तक हाइजैकिंग के 18 घंटे बीत चुके थे।

कैप्टन शरण ने कहा कि सुबह जब मैं कॉकपिट में गया तो वहां अलग-अलग तरह के हथियार और अलग-अलग रंग के हैंड ग्रेनेड रखे हुए थे। पांवदान गोलियों से भरा हुआ था।

ज़िंदगी लाइव

मुसीबतों, परेशानियों, हादसों और कुदरत के कहर में फंस कर...

सारे शो देखें »

क्या आपको लगता है कि भारत के दिए सबूतों पर पाक कोई कार्रवाई करेगा?

हां

नहीं

पता नहीं

हमारे बारे में | विज्ञापन | हमें बताइए | RSS

कॉपीराइट IBN7 खबर। सर्वाधिकार सुरक्षित