जम्मू मुद्दे पर पीएम ने बुलाई सर्वदलीय बैठक

TimeWed, Aug 13, 2008 at 08:52 , Updated at Wed, Aug 13, 2008 देश सेक्शन

Tagsटैग: Jammu,Protest,Shrine | 0 कमेंट्स

Email Print

बेकाबू होती हिंसा से चिंतित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दूसरी बार सर्वदलीय बैठक बुलाई।

बेकाबू होती हिंसा से चिंतित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दूसरी बार सर्वदलीय बैठक बुलाई।

    

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में अमन बहाल करने के लिए सरकार किसी फार्मूले की तलाश में है।

बेकाबू होती हिंसा से चिंतित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को दूसरी बार सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बैठक का उद्देश्य विवाद का ऐसा समाधान निकालना है जो जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों के लोगों को स्वीकार्य हो।

साथ ही केन्द्र ने मुजफ्फराबाद के रास्ते व्यापार करने की मांग का भी समर्थन किया है, बशर्ते पाकिस्तान इस प्रस्ताव पर राजी हो।

मालूम हो कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड भूमि विवाद को लेकर जम्मू क्षेत्र में कथित 'आर्थिक नाकेबंदी' के खिलाफ कश्मीर घाटी के श्रीनगर, लासजान, बांदीपोरा और नागाबल इलाकों में प्रदशर्नकारियों पर पुलिस ने फायरिंग की थी। जिसमें करीब 14 लोगों की मौत हो गई थी।

लसजान में एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई। यहां पूर्व मंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता जावेद मुस्तफा मीर पर भीड़ द्वारा किए गए हमले के बाद दहशत में उनके अंगरक्षक ने गोली चला दी। इस घटना में एक पुलिस अधिकारी भी घायल हो गया।

पुराने श्रीनगर के रैनावाड़ी में हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अर्धसैनिक बलों द्वारा चलाई गई गोली में एक बच्चे की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। यहां भीड़ ने नेशनल कांफ्रें स के वरिष्ठ नेता सईद अखून के घर को जला दिया।

कश्मीर घाटी में सोमवार को पुलिस फायरिंग में एक हुर्रियत नेता सहित पांच लोगों की मौत के बाद पूरे राज्य में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है।

इससे पहले पिछले सप्ताह गृहमंत्री शिवराज पाटिल के नेतृत्व में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की श्राइन बोर्ड से बातचीत बगैर किसी नतीजे के खत्म हो गई थी।

पांच अगस्त को हुई बैठक में प्रधानमंत्री ने शांति बनाए रखने की अपील की थी और एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को राज्य के दौरे पर भेजने की बात कही थी।

पिछले दो माह से राज्य के दोनों क्षेत्रों में श्रीअमरनाथ श्राइन बोर्ड को पहले जमीन आवंटित करने और फिर वापस लिए जाने को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत हो चुकी है।

साथ ही सरकार की कोशिश है कि आंदोलनकारी जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के 2005 उस फैसले पर राजी हो जाए। जिसमें दो महीने के लिए जमीन श्राइन बोर्ड को सौंपी जाती है। और बाकी समय जमीन वन विभाग के पास रहती है। इस बीच घाटी के बिगड़े हालत को समझते हुए सरकार ने मुजफ्फराबाद के रास्ते व्यापार करने की मांग का भी समर्थन किया है। सरकार का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत में ये मुद्दा काफी समय से उठता रहा है और दिक्कत पाकिस्तान की तरफ से है।

साथ ही भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर के हालात पर दिए गए पाकिस्तान के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे भारत के अंदरुनी मामलों में अनचाहा हस्तक्षेप करार दिया है। जो भारत- पाकिस्तान शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुंचा सकता है।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने रविवार को घाटी में हुई फायरिंग को पुलिसिया ज़्यादाती और सुरक्षाबलों का बेजा इस्तेमाल बताया था।

ज़िंदगी लाइव

मुसीबतों, परेशानियों, हादसों और कुदरत के कहर में फंस कर...

सारे शो देखें »

क्या आपको लगता है कि भारत के दिए सबूतों पर पाक कोई कार्रवाई करेगा?

हां

नहीं

पता नहीं

हमारे बारे में | विज्ञापन | हमें बताइए | RSS

कॉपीराइट IBN7 खबर। सर्वाधिकार सुरक्षित