बिंद्रा ने इतिहास रचा, ओलंपिक में स्वर्ण जीता
Mon, Aug 11, 2008 at 10:03 , Updated at Tue, Aug 12, 2008 खेल सेक्शन
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बीजिंग। ओलंपिक में भारत ने दशकों बाद स्वर्ण पदक पर कब्जा किया है। भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने शूटिंग में स्वर्ण पदक हासिल कर भारत की सालों की हसरत को पूरा कर दिया।
अभिनव ने 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग का स्वर्ण जीता है। मालूम हो कि व्याक्तिगत स्पर्धा में ओलंपिक में हासिल किया गया यह पहला स्वर्ण है। इससे पहले कोई भी भारतीय ओलंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण नहीं ला सका।
अभिनव बिंद्रा ने कहा कि यह मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। उधर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अभिनव को उनकी एतिहासिक जीत पर बधाई दी है।
अभिनव बिंद्रा की मां बबली बिंद्रा ने कहा कि मैं अपनी खुशी को बयान नहीं कर सकती हूं। उसने देश का सम्मान बढ़ाया है। मैंने अभिनव से कहा था कि मैं जानती हूं कि तुम इसे कर सकते हो। अभिनव कई सालों से तपस्या कर रहा था। अब उसे अपनी मेहनत का फल मिला है। वह बहुत की लगनशील और मेहनती है। मैं उसके प्रदर्शन को सांस रोककर देख रही थी।
उधर भारतीय दल के साथ बीजिंग में मौजूद केंद्रीय खेल मंत्री एमएस गिल ने अभिनव को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए बधाई दी है। उन्होंने उनके मां-बाप को भी बधाई दी है।
पूर्व ओलंपियन व हॉकी खिलाड़ी रहे जफर इकबाल ने कहा कि ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना बहुत मायने रखता है। उन्होंने भारत के युवाओं को रास्ता दिखाया है।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने भी अभिनव बिंद्रा को उनके इस गौरवशाली मौके पर ढेरों बधाई दी है। भारतीय इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब आलंपिक की एकल प्रतियोगिता में किसी ने स्वर्ण पदक जीता हो। बिंद्रा की इस जीत ने भारत देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिखाया। प्रतिभा पाटिल ने इस जीत को गोल्डन परफॉर्मेंस कहा।
इससे पहले राज्यवर्धन सिंह राठौर ने 2004 एथेंस ओलंपिक में निशानेबाजी में ही रजत पदक हासिल किया था।
25 साल के इस नौजवान ने प्रतियोगिता में कुल मिलाकर 700.5 अंक हासिल कर यह स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
बिंद्रा के इस उप्लब्धी पर भारतीय ओलंपिक संघ के अघ्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने कहा कि वह विश्व के सबसे अच्छे निशानेबाज हैं और उनकी इस जीत से साथ गए खिलाड़ियों का मनोबल काफी ऊंचा होगा।
अभिनव के इस जीत से खुशी से फुले नहीं समा रहे ओलंपिक के राष्ट्रीय कोच सन्नी थॉमस ने कहा कि उनकी जीत से हम सब बहुत खुश हैं। वो एक साहसी और मेहनती खिलाड़ी हैं। इस समय निशानेबाजी के सारे खिलाड़ी मिलकर जश्न मना रहे हैं। हमें उन पर गर्व है और इसे भारत की शुरुआत माना जाना चाहिए। अभिनव एक शांत और सुशिल खिलाड़ी हैं और इस जीत को उन्होंने बड़े सादगी से स्वीकार किया है।
खेल रत्न अवार्ड से सम्मानित बिन्द्रा ने इससे पहले 2002 के राष्ट्रमंडल खेलों के दोहरे निशानेबाजी प्रतियोगीता में एक स्वर्ण और एक रजत भारत के नाम कर चुके हैं। इससे पहले आज हुए इसी प्रतियोगिता में भारत के ही गगन नारंग बेहतर खेल न दिखा पाने की वजह से बाहर हो गए। प्रतियोगिता में चीन के झू क्यूनान 699.7 अंको के साथ रजत और फीनलैंड के हेनरी हाक्कीनेन 699.4 अंको के साथ कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
ये मा लिए गोराव की बता है ,की हमे एसा शूटआर मिला है जिसने दुनिया मे धमाल मचा दी है
अभिनव ने बास्टव मे अपने नाम के अनुसार काम किया. सरकार को अभिनव को मालामाल कर देना चाहिए तक्की इसको



























पोस्टे बी bobby
अबेनब तूने देश का नाम रोशण कर दीआ हे .हमे क़ेबल क्रेकत ही नही बाक़ी ओर खेलो की और धएन
रेप्ली टू थिस कमेंट