अमरनाथ विवाद : वार्ता विफल, आंदोलन जारी
Sat, Aug 09, 2008 at 08:08 , Updated at Sun, Aug 10, 2008 देश सेक्शन
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जम्मू। गृह मंत्री शिवराज पाटिल के नेतृत्व में शनिवार को जम्मू पहुंचे 18 सदस्यीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल और अमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति (एवाईएसएस) के बीच वार्ता विफल हो गई है।
इसके साथ ही श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड को आवंटित भूमि दोबारा वापस किए जाने की मांग को लेकर जम्मू में पिछले एक माह से चल रहे हिंसक प्रदर्शन के थमने की संभावना धूमिल हो गई है।
इस बीच आंदोलनकारियों ने कहा कि वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। सरकार का कहना है कि वह किसी ऐसे हल की तलाश में है जो सभी को मान्य है।
समिति के संयोजक लीला करण शर्मा ने संवाददाताओं से कहा कि हमने गृह मंत्री (शिवराज पाटिल) और प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों से कह दिया है कि जब तक श्राइन बोर्ड को जमीन नहीं दी जाती हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
समाज के विभिन्न वर्गो से बात करने के बाद शिवराज पाटिल ने संवाददाताओं से कहा कि हमने संघर्ष समिति के साथ ही विभिन्न वर्गो से अलग-अलग विचार सुने।
इससे पूर्व एवाईएसएस ने वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया था। इसके बाद तीन कश्मीरी नेताओं केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज, नेशनल कांफ्रेंस के संरक्षक फारूक अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती द्वारा खुद को इस वार्ता से दूर कर लिए जाने के बाद एवाईएसएस वार्ता को तैयार हुई।
एवाईएसएस ने कहा था कि वह इस प्रतिनिधिमंडल से बात नहीं करेगी, क्योंकि इसमें वे लोग शामिल हैं, जो इस भूमि विवाद के लिए ‘उत्तरदायी’ हैं।
एवाईएसएस के अध्यक्ष लीला करन शर्मा ने बताया - हमने सर्वदलीय बैठक में भाग लेकर अपने विचार रखने का फैसला किया था।लेकिन उसमें तीन प्रमुख कश्मीरी नेताओं- केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज, नैशनल कांफ्रेंस के संरक्षक फारूख अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की मौजूदगी ने हमें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और वार्ता का बहिष्कार करने के लिए विवश किया।
उन्होंने कहा -राज्य में जो आग लगी है, उसके लिए सोज, महबूबा और फारूख जिम्मेदार हैं। वे अपराधी हैं। हम उनसे बात कैसे कर सकते हैं।
सर्वदलीय बैठक के मद्देनजर सेना ने सख्ती से निषेधाज्ञा लागू कर रखी है। पिछले तीन दिनों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब कर्फ्यू में एक मिनट की भी ढील नहीं दी गई। अधिकारी ने बताया -हम कोई परेशानी नहीं चाहते।
प्रशासन की आशंका की वजह पिछले सप्ताह की वह घटना है, जब प्रदर्शनकारियों ने फारूख तथा महबूबा के यहां पहुंचने पर हवाई अड्डे और राजभवन की घेराबंदी कर दी थी। दोनों नेता राज्यपाल एन.एन. वोहरा के साथ सर्वदलीय बैठक में शिरकत के लिए आए थे।
गौरतलब है कि श्रीअमरनाथ श्राइन बोर्ड भूमि आवंटन के मसले ने घाटी में सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लिया है।
जहां जम्मू में लोग बोर्ड को आवंटित भूमि वापस किए जाने की मांग कर रहे हैं, वहीं घाटी के मुस्लिम इसका विरोध कर रहे हैं।
जम्मू कश्मीर अमरनाथ विवाद की आग में गत पांच हफ्तों से अधिक समय से झुलस रहा है, जिसमें कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है।



























