जम्मू की आग ने रोके घाटी में निकाह
Wed, Aug 06, 2008 at 18:45 , Updated at Wed, Aug 06, 2008 देश सेक्शन
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खालिद हुसैन
श्रीनगर। अमरनाथ श्राइन विवाद का असर अब कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। दिन-ब-दिन, हालात बद–से बद्तर होते जा रहे हैं।
रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली ऐसी कई चीजें हैं, जिनके नहीं मिलने से आम लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
कश्मीर में ज्यादातर सामान जम्मू से ही आता है। पिछले कई हफ्तों से श्रीनगर और जम्मू को जोड़ने वाले इकलौते हाई-वे के बंद हो जाने की वजह से शादियों तक को रद्द कर दिया गया है।
मरीजों को दवाइयां नहीं मिल रही हैं। दवा दुकानों का भी स्टॉक खत्म होने के कगार पर है। पेट्रोल पंपों का भी यही हाल है।
पूरे शहर में कहीं तेल नहीं मिल रहा है। दवा दुकानदार फ़याज़ अहमद डार ने बताया कि 90 फीसदी दवाएं खत्म हो गई हैं।
10-12 दिन यही हाल रहा तो मुश्किल और बढ़ जाएगी। स्थानीय निवासी रउफ अहमद कहते हैं कि घर में बीमार हैं। उन्हें देखने जा रहा हूं। कहीं पेट्रोल नहीं है। जम्मू के लोगों के रवैये से कश्मीरी कारोबारी बेहद नाराज हैं। कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स ने तो जम्मू का बायकॉट करने तक का ऐलान कर दिया है।
उन्होंने साफ कर दिया कि अब वो जम्मू के साथ कोई रिश्ता नहीं रखेंगे। जान मोहम्मद, मेंबर, कश्मीर चैंबर ने कहा कि जम्मू से कोई माल नहीं लेंगे। उन्होंने सदियों पुरानी परंपरा को ठेस पहुंचाई है।
श्रीनगर के बिगड़ते हालात और राज्य के ही लोगों में बढ़ती दूरियों ने सरकार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। हालात पर अगर जल्द ही काबू नहीं पाया गया तो जम्मू और कश्मीर के बीच तल्खी और बढ़ती जाएगी।



























