बहस:कैसे हल होगा अमरनाथ जमीन विवाद?
Tue, Aug 05, 2008 at 12:36 , Updated at Tue, Aug 05, 2008 सिटी खबरें सेक्शन
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अमरनाथ जमीन विवाद को लेकर भड़की विरोध की चिंगारी ने जम्मू को बुरी तरह से चपेट में ले लिया है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन हालात पर काबू पाने के लिए हर तरह की कोशिश कर रहा है पर उसका कोई असर होता नजर नहीं आ रहा। क्या जम्मू में मीडिया पर पाबंदी लगाना सही है? क्या इस मुद्दे को हल करने को लेकर हमारे नेता गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं?
आपकी नजर में इस विवाद का क्या हल निकाला जा सकता है? आप इस मुद्दे पर जारी बहस में हिस्सा लेने के लिए नीचे कमेंट सेक्शन में जाकर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं। आपकी प्रतिक्रिया नीचे प्रकाशित की जाएगी। जरूरी होने पर उसे आईबीएन7 पर इससे जुड़ी खबरों में शामिल भी किया जाएगा।
सुनील मित्तल
sunilmittal8@hotmail.com
जम्मू में आज जो हाल है वो इस कांग्रेस की निकम्मी सरकार की वजह से है, पहले तो इस सरकार ने अमरनाथ बोर्ड को ज़मीन दी फिर कुछ लोगों के दबाव में आकर ज़मीन वापस ले ली। इस सरकार ने सोचा कि हिंदुओ का विरोध ज़्यादा दिन तक नही चलेगा, लेकिन ये आंदोलन दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। सरकार की हर कोशिश नाकाम हो रही है यहा तक की सेना भी कुछ नही कर पा रही है जब जनता सड़कों पर आ जाती है तो कोई भी सरकार उनको डंडे के बल पर दबा नही सकती। अब सरकार को तुष्टिकरण की नीति छोड़कर जो भी फ़ैसला देश हित में हो वो लेना चाहिए। ज़्यादा देर देश के लिए ख़तरा हो सकती है। अभी भी समय है सरकार चेत जाए।
प्रियब्रता
alokpeace@yahoo.co.in
इस देश का कुछ नहीं हो साकता। मेरा मानना है कि धर्म आज की दुनिया में न्युक्लिअर बॉम्ब से भी ज़्यादा ख़तरनाक है। देश में एक ही जगह तमिलनाडु है जहां लोग भविष्य के लिए सोचते हैं और अपना पूजा पाठ अपने घर में ही सीमित रखते हैं। जो भी संप्रदाए हो उसको यह समझना चाहिए कि धर्म ऐसा भ्रम है जो एक दिन इस दुनिया को तबाह कर देगा। धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों मंदिर-मस्जिद से निकलो और देश के बारे में सोचो। मेरा मानना है की इस देश में धर्म के अधिकार को पूरी तरह मिटा ही देना चाहिए। देश सबसे बड़ा है, जो देश के नहीं हो सका वो किसका क्या होगा?
कनिका
kanu1504@gmail.com
जम्मू के हालात उस नज़रअंदाज़ी का नतीज़ा हैं जो सरकार बरसों से करती आई है! कश्मीर के लोग कहते हैं कि जम्मू में हो रहे प्रदर्शनो के कारण हमें ज़रूरी समान नहीं मिल रहा पर में उन्हें यह कहना चाहती हूं कि जम्मू में भी कोई पार्टियां नहीं चल रहीं! उनके अधिकारों, ज़रूरतों की सरकार को काफ़ी चिंता है पर जम्मूवासी जब अपने हक़ के लिए आवाज़ उठातें है तो उसका जवाब हमें गोलियां खाने को मिलती हैं। क्या यह मानव अधिकारों का हनन नही है?
रोहित वर्मा
rohit verma [hot_verma0909@yahoo.co.in]
अब तो हमारे जम्मू में केबल भी बंद हो गई है। न कोई खबर आ रही है और न ही बाहर का पता चल रहा है और पुलिस वाले गलियों में आकर लोगों को पकड़ ले जा रहे हैं। तो क्या सरकार तक जम्मू वालों की आवाज नहीं पहुंच रही।
Rajesh Khajuria
khajuria.raj@rediffmail.com
मैं सबसे पहले मीडिया से ही पूछना चाहता हूं कि अगर यासीन मालिक कहते हैं कि जम्मू के लोग कम्युनल हैं और जम्मू के मुस्लिम ख़तरे में हैं तो इस बात का सच आप ही दुनिया को बताएं कि क्या जम्मू में सच में मुस्लिमों को मारा जा रहा है या यहां कई मुस्लिम भी श्री अमरनाथ संघर्ष समिति के साथ हैं। यासीन मालिक और गिलानी सिर्फ़ हिंदू-मुस्लिम को लड़ाना जानते हैं जोड़ना नहीं। हम सारे लोग यहा जम्मू में एक ही मांग कर रहे हैं कि अमरनाथ की ज़मीन जो कि पहले ही श्राईन बोर्ड इस्तेमाल कर रहा था जो अब भी कर रहा है पर सिर्फ़ कोर्ट के ओर्डर के अनुसार वहां पर अस्थाई स्ट्रक्चर बना दिए जाएं। इसमें कश्मीर वालों की ज़मीन कोई नही ले जाएगा। हमें किसी धर्म से कोई लड़ाई नहीं है। बस हम इंडिया में डेमोक्रेसी चाहते हैं जहां कोर्ट ओर्डर की रेस्पेक्ट हो, जहां सरकार किसी भी फंडामेंटलिस्ट की आगे नहीं झुके। चाहे वो हिंदू हो या मुस्लिम।
शिशिर तिवारी
shishirtiwari@rediffmail.com
जम्मू की समस्या सिर्फ़ अमरनाथ भूमि से संबंधित नहीं है। यह समस्या 20 सालों से जम्मू की आवाज़ न सुनने का नतीज़ा है। केंद्र और राज्य सरकार सिर्फ़ कश्मीर की आवाज़ सुनती हैं। सरकार को यह भी ध्यान देना होगा की यह किसी पार्टी का आंदोलन नहीं है बल्कि यह जम्मू के जन-जन की आवाज़ है। कब तक हिंदुओं की आवाज़ उठाने वालों को आप सांप्रदायिक बोलते रहोगे।
हरीश मिश्रा
जिला दमोह
grish fb [hcmdamoh@yahoo.com]
जम्मू कश्मीर सरकार ने दबाव में आकर जमीर वापस लेकर बहुत बड़ी गलती की है। किसी की धार्मिकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ अपने निजी स्वार्थ के लिए ठीक नहीं है। वहां कि पुलिस ने जिस निर्ममता से बेकसूर लोगों की पिटाई की है और मीडिया वालों को मारा है वह बहुत की दुर्भाग्यपूर्ण है। अपनी सरकार बचाने की खातिर किसी के हक छीन लेना बहुत ही गलत है। अगर भारत में मीडिया न होती तो यहां का हर नागरिका बहुत ही बदतर जीवन जी रहा होता और सफेद कपड़े पहले ये लोग देश को खा डालते। इसका एक ही हल है जमीन वापस देना और हड़ताल-सभाओं पर सख्ती से रोक लगाना।
सबसे पहले तो हुरियत को बन कर दीजिए क्योकि ये वहाँ की जनता को आज़ाद कश्मीर के सपने दिखाकर पाकिस्तान
कोंग्रेस सिर्फ़ मुस्लिम के पक्ष की बात करती है येह हमेशा हिंदू के खिलाफ़ काम करती सिर्फ़ मुस्लिम वोट की
इस मामले को जलद ही हाल करलेना चाहिए नही ट ये मामला राजनीति से परेरत हो जाएगा राजनिता पार्टी को
राजनीति को शोद कर हिंदू ओर मुस्लिम को एक जुट हो कर इसका स्मधान खोजना चाहिए




























पोस्टे बी pankaj mishra
कोंगरेसस की सरकार ने जो भी अमरनाथ सृाईं बोआर्ड ज़मीन देकर जो फ़ैसला लिया वो एक तरीक़े से धर्म की
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