दहेज एक अभिशाप, हर रोज हो रहीं महिलाएं शिकार
Wed, Jun 24, 2009 at 18:39 , Updated at Wed, Jun 24, 2009 सिटिज़न जर्नलिस्ट सेक्शन
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नोएडा। भारत में हर साल 25000 से ज्यादा लड़कियों को दहेज के लिए या तो मार दिया जाता है या फिर शारीरीक-मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। कुछ ऐसा ही हुआ दिल्ली से सटे नोएडा की आरती के साथ। दहेज के लालच में ससुराल वालों ने आरती को जिंदा जलाने की कोशिश की।
आरती को उसके पिता ने अपनी हैसियत से ज्यादा दान-दहेज देकर विदा किया। लेकिन गजरौला में रहने वाले उसके ससुरालवाले लगातार उसे दहेज के लिए परेशान करते रहे। एक दिन तो ससुराल वालों ने हद कर दी उन्होंने आरती को आग लगाकर जिंदा जलाने की कोशिश की।
सिटीज़न जर्नलिस्ट आरती के पिता किरण पाल ने आईबीएन7 से मदद की अपील की। चैनल पर ये खबर दिखाए जाने के बाद सफदरजंग अस्पताल के एक डॉक्टर आरती का इलाज करने के लिए आगे आए। इमरजेंसी मेडिकल सर्विस(SOS) ने किरण पाल की मदद के लिए उन्हें मुफ्त एंबुलेंस मुहैया कराई ताकि आरती को उसके गांव दादरी से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया जा सके। अस्पताल में आरती को ऑक्सीजन पर रखा गया। डॉक्टर लगातार आरती के हालात पर निगरानी रखते रहे।
आरती का इलाज शुरू हुआ तो आईबीएन7 ने इस मामले में हो रही कानूनी कार्रवाई के बारे में पड़ताल शुरू की। एसएसपी के आफिस में इस मामले को लेकर FIR दर्ज की गई थी।
एफआईआर की कॉपी ढूंढने के लिए अधिकारियों ने अपने रिकार्ड्स देखे। आखिरकार उन्होंने बताया कि एफआईआऱ की कॉपी 6 जून को स्पीड पोस्ट के ज़रिए गजरौला पुलिस स्टेशन भेज दी गई है। लेकिन गजरौला का पुलिस थाना ने कहा कि कॉपी अभी नहीं मिली है। इसलिए कोई कार्रवाई नहीं कर पाए हैं। फिर वहीं से फोन के जरिए नोएडा के एसएससी से बात की गई कि उन्होंने कागज़ अभी तक भेजे हैं या नहीं।
एक बार फिर गजरौला पुलिस से इस बारे में संपर्क किया गया ये जानने के लिए कि इस केस में आगे करवाई हुई है या नहीं। जो अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे थे उन्होंने कहा कि केस धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है पर अभी तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। उधऱ धीरे-धीरे आरती के हालत में सुधार हो रहा है।



























