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पुलिस अंकल गुस्साए, बच्चों ने 7 घंटे ठंड में बिताए

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लेखक
संदेश
Harendra Singh
Place : Ghaziabad
जिस दिन भारत देश की पुलिस महकमा-अधिकारी और राजनेता सुधर जाएगें उस दिन देश का आतंकवाद ख़त्म हो जाएगा ये लोग देश के ख़ज़ाने को लूट रहे हैं और सड़क पर खड़े होकर हाथ फैलाकर भीक माँगते हैं जैसे इन लोगो को तनखहा नही मिलती भारत के नागरिक टेक्स इस लिए देते हैं की देश और देश के नागरिकों की सरकार और सरकारी महकमें के लोग उनकी सुरक्षा करेंगे और देश का विकास करेंगे जब इनके घरवाले फ़स्ते हैं तो कंधार तक आतंकवादियों के साथ जाते हैं और जब आम आदमी मरता है तो सिर्फ़ निंदा करते हैं कहते हैं एलेक्शण में वोट दो जब सत्ता आएँगें तब देखेंगे और सत्ता में आनें पर सिर्फ़ काम के नाम पर पाँच साल तक निंदा ही होती रहती है पावर होने के बौजूद ये सभी सुस्त हैं. सरकारी कर्मचारिओं को 58 वर्ष मे रीटारमेंट पर जाना होता है लेकिन राजनेताओं को आजीवन कुर्सी पर बने रहने ही छूट होती है जब जनता इनको चुन सकती हैं ये अधिकार भी जनता के पास होना चाहिए की इयंके लिए भी ये क़ानून बने की ईनके लिए भी 55 वर्ष बाद में चुनाव लड़ने पर रोक लगनी चाहिए अपने लिए तो एक सेकेंड में मेज़ थपथपकर विधेयक पास कर लेते हैं और जब जनता के लिए कुच्छ लागू करना होता तो सरकार गिर जाती है मगर वह विधेयक लागू नहीं होता है. यह इस देश का दुर्भाग्य है.

( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 18:51 )        

Arpit
Place : sydney
इन्डी कोप्स आर ओँल्य फो वीप पेओपले

( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 18:11 )        

ANAND
Place : LUCKNOW
इस तरह केलोगो को सज़ा देना ही एक विकलप है

( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 17:55 )        

Ali
Place : hyderabad
पोलिसे का येह वव्हार बिल्कुल की ग़लत हैं और इस क उन्हे सज़ा देनी चाहिए. सज़ा मिलनी चाहिए, मैं येह मेस्सगे अपने आसुन से लिख रहा हूँ के अपने बाक्च्े को भी इसी तरह 8 घंटे उन्हे भी छोड़ेना चाहीय. तब पता चलेगा के बकचे का दर्द कैसा हैं.

( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 17:43 )        

tpod
Place : ANUCHIT
इसको कहते हैं तिल का ताड़ बनाना या बात का बतंगड़ करना. आख़िर बात बस इतनी सी ही तो है. बच्चों की बस एड़ी जी की गाड़ी से टकरा गयी. एड़ी जी को ग़ुस्सा आना लाजिमी है. ज़रा सोचिए अगर कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती तो हम सब की प्रतिक्रिया क्या होती. ड्राइवरों की लापरवाही से भी तो इनकार नहीं किया जा सकता है.

ड्राइवर को पोलिश थाने ले जाने में कौन सी ग़लत बात हो गयी. उसे समझाना, डाँटना-फटकारना क्या अनुचित है ?

बच्चों के बारे में हाय-तौबा मचाई जा रही है. बच्चे पिकनीक जा रहे थे. ठंढी का मौसम है. ज़ाहिर है उनके पास गरम कपड़े ज़रूर होंगे. बच्चों के साथ उनके शिक्षक भी थे. उनके रहते बच्चों को खाने-पीने की तकलीफ़ कैसे हो गयी यह बात समझ में नहीं आती. न्यूज़ कुछ बढ़ा-चढ़ा कर लिखा प्रतीत होता है.

हालाँकि देश के, पोलिश प्रशासन, प्रशासनिक-व्यवस्था की ख़स्ता हालत से सभी परिचित हैं फिर भी इसका मतलब यह नहीं है की हम हर बात में कोई न कोई क्मी ढूँढने की कोशिश करें तथा उन कमियों को अनुपात से ज़्यादा बढ़ा-चढ़ा कर पेश करें.

( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 17:16 )        

Vikas Gupta
Place : Delhi
इस देश के लिए ज़ीं लोगो ने क़ुर्बानी दी आज वो ज़िंदा होते तो यही कहते इससे अच्छा तो हम ग़ुलाम थे तब कुछ इंसाफ़ तो होता था अँग्रेज़ो ने सही कहा था आज़ादी के 50 साल बाद यहा गुंडाराज़ होगा जो सबको दिखाई दे रहा है जो नेता है या पोलिसे में है या फिर उँची पोस्ट पर है उसकी तो सुनवाई है बाक़ी ज़ुल्म सहे और चुप रहे अब यही हिंदुस्तान मे क़ानून है जो अँग्रेज़ो के राज में भी नही था उस समय इंसाफ़ तो होता था पर अब तो सब रामभरोसे है

( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 16:28 )        

Umesh
Place : hyderabad
अरे यार अगर हम लोग यहाँ पर कुछ लिख भी ले तो फिर भी किसी को फ़र्क नही पड़ेगा. बस आ दिमाग़ जलेगा और कुछ नही. सारे लोग भ्रसत हैं. इस देश का कुछ नही हो सकता जब तक क्रीमिनल लोग राजनीति करते रहेंगे. अगर इस घटना से आपको दर्द हो रहा है तो पहले क्रीमिनल को वोट देना बंद कर दो.

( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 14:24 )        

more Ritesh Kumar
Place : Delhi
पहले देश अँग्रेज़ो का ग़ुलाम था, आज इन नेताओं और ब्यूरोकृेटेस का ग़ुलाम है.
ख़ास कर इस देश की पुलिस तो बिल्कुल ही नाकाम साबित हुई है.
पिछले कुछ घटनाओं पे अगर नज़र डाले तो , ये साफ़ ज़ाहिर होता है की पुलिस नेताओं और पहुँच वालों के हाथ बिक चुकी है.
आम आदमी के लिए ना तो ये पुलिस है ना ही ये नेता, जबकि ये दोनो ही आम आदमी की कमाई पे पलते हैं.
इस समस्या का हल निकालने के लिए ये ज़रूरी है की देश के संविधान और क़ानून मे परिवर्तन किया जाए.

( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 14:05 )        

mohammad ishtyaquddin
Place : patna
येह ख़बर पाढ़के बहुत दुख हुआ मासूम से बच्चों के चेहरे मुर्झा गये से कुम उनके घर वालों को हे फ़ोने कर देते तो अच्छा था दिल हे पतहर का हो गाय तो क्या कह सकते हैं.

( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 13:57 )        

Brij Kumar
Place : Delhi
सबसे पहले मै मीडिया को कोटि-कोटि धन्यवाद देना चाहूँगा, क्योकि ................... अन्यता जो हो रहा है, उस पर कारवाई करना तो दूर, हमे भनक भी नही लगे. रही बात सज़ा देने की, सज़ा कौन देगा, क्या वह उससे क्म है. कोई किसी से क्म नही है. जो जितना बड़ा अधिकारी या नेता है, वह उतना बड़ा भ्र-स्ट है. अब तो भगवान ही मालिक है.


( Posted: Wednesday, November 19, 2008 at 13:33 )        

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