बेटे की मौत का इंसाफ मांगता एक पिता
सड़कें-हाइवे और उन पर तेजी से दौड़ती जिंदगी, हमने इसे नाम दिया है तरक्की का। लेकिन ये सड़कें और हाइवे ही अगर हमारी मौत की वजह बन जाएं तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। दिल्ली से सटे गुड़गांव का एक्सप्रेसवे करोंड़ों की लागत से बना लेकिन फिर भी इसमें रह गईं ऐसी खामियां जिससे कई जानलेवा हादसे हुए। सिटीज़न ज़र्नलिस्ट के.एस. आनंद ने भी अपने बेटे के खोया लेकिन फिर उन्होंने तय किया की अब और हादसे नहीं होने देंगे।
किलर हाइवे पर हादसे के लिए सरकार जिम्मेदार

पिछले 5 साल में इस हाईवे पर 4000 से भी ज्यादा दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
विपिन ने छेड़ी मुहिम ‘रोड पे राही भाई भाई’

विपिन सूरी भी कभी सड़कों पर ग़ुस्से में होने वाले हादसों का एक हिस्सा थे।
भक्षक बना रक्षक, रंग लाई एक शिकारी की मेहनत

शिकारियों को रोकने के लिए सुरेन्द्र ने तालाबों के किनारे कुछ पेड़ों पर मचान बनाए।
दहेज एक अभिशाप, हर रोज हो रहीं महिलाएं शिकार

सिटीज़न जर्नलिस्ट आरती के पिता किरण पाल ने आईबीएन7 से मदद की अपील की।
पर्यावरण बचाने के लिए आगे आएं, हमें लिखें

बदलते मौसम ने दुनियाभर की सरकारों की नींद उड़ा दी है।
जंगल बचाने के लिए शंकर भाई की मुहिम

शंकर भाई लोगों को बताया कि किस तरह उन्होंने अपने जंगलों को बर्बादी से बचाया।
भगवान पर चढ़ाए फूलों से बना होली का रंग

मधुमिता पुरी उन बच्चों के लिए काम करती हैं जो शारीरिक रूप से अक्षम है।
कोयले की खदानों में जान गंवाते मजदूर

वासन्ती लोगों का ध्यान आसनसोल में चल रही कोयले की अवैध खदानों की तरफ ले जाना चाहती हैं।
...सिर्फ 10 रुपए महीना वेतन है इनका

मोहन लाल शर्मा पिछले 7-8 साल से महिलाओं की आवाज अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
बंटी की कोशिश से सुधरी रेललाइन की समस्या

बंटी जम्मू के कठुआ जिले का रहने वाले हैं।
नदियों को दोबारा जीवन देने में जुटे हैं जयेश

जयेश नायक एक किसान हैं और पिछले 7 साल से गुजरात की नदियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
वनविभाग की धांधली से बलि चढ़ रहे पेड़

दिल्ली के प्रवीन नारंग बने हैं सिटीज़न जर्नलिस्ट और बता रहे हैं धांधली की बजह।
हाइवे के लिए कटवा दिए 60000 हरे-भरे पेड़

सरकार ने 60,000 पेड़ों को बेरहमी से काट दिया।
बढ़ी स्कूल फीस से हों परेशान तो हमें बताएं

स्कूलों ने अपनी फीस 30 से 40 फीसदी बढ़ा दी है।
किसानों के हक के लिए लड़ते विजय चौहान

लोगों की लड़ाई लड़ रहे हैं सिटीजन जर्नलिस्ट विजय चौहान।
वोटिंग के लिए लोगों को जागरूक करते नौजवान

सिटीज़न जर्नलिस्ट अंकित और उनके साथियों ने मिलकर लोगों की सोच को बदलने को फैसला किया है।


























