नर्क में जीने को मजबूर हैं भलस्वा के लोग
दिल्ली में तमाम ऐतिहासिक जगहें आपने देखी होंगी लेकिन दिल्ली में एक नर्क भी है जिसे खुद सरकार ने बसाया है। इस नर्क का नाम है भलस्वा। शहर की आबादी से 25 किलोमीटर दूर भलस्वा में करीब 28000 लोग रहते हैं। साल 2000 में दिल्ली में जगह-जगह बनी झुग्गियों को तोड़ा गया और उसमें रहने वालों को भलस्वा में बसने के लिये ज़मीन दी गयी। तब वायदा किया गया था कि यहां रहने वालों को बुनियादी सुविधाएं सरकार मुहैया कराएगी।
गरीब बच्चों को पढ़ा रहे हैं पेंटर चंदन पाल

चंदन पाल सिंह पेशे से एक पेंटर हैं और अपनी इसी छोटी सी कमाई से वो स्कूल चलाते हैं।
विकलांग अविनाश बने दूसरों के लिए सहारा

अविनाश के लिए जिंदगी का मतलब है हंसते हुए मुश्किलों को हल करना।
250 लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं कैलाश

कैलाश अब तक 250 लोगों की ज़िंदगी बचा चुके हैं।
सही राशन के लिए रंग लाई प्रवीण भाई की लड़ाई

पारंपरिक लोहे के तराजू से सही वज़न का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है।
क्यों मर रहे हैं दिल्ली के पेड़?

दिल्ली सरकार ने 1994 में इसके लिए Trees Act बनाया था।
बिजली-पानी काटी लेकिन मारिया हारे नहीं

मारिया ने अपनी कॉलोनी की पचांयत के गलत फैसलों के खिलाफ आवाज़ उठाई।
पक्षियों के बसेरे को बचाना चाहते हैं गुलदेव

गुलदेव राज जम्मू के एक गांव में मौजूद पक्षियों के एक बसेरे को बचाना चाहते है।
लोगों की सोच बदलने में जुटे संजीव

दिल्ली के संजीव बताते हैं कि तेल के पीपों से बने एक स्ट्रक्चर के जरिए हमारे आस-पास हर चीज़ बदल सकती है।
गांव को फ्लूरोसिस से बचाने की अनोखी मुहिम

फ्लूरोसिस नामक बीमारी के बचाव के लिए डॉक्टर ब्रह्मजीत सिंह ने पहल की।
ऐसे CCTV किस काम के जिनकी मॉनीटरिंग न हो

चड्ढा ने मार्केट में लगे हर एक कैमरे का बारीकी से मुआयना किया।
टैक्सी ड्राइवर संजय तो फरिश्ता बन गए

जब संजय ने लोगों को ऐसे देखा तो उन्हें लगा कि अपना दर्द भूलकर लोगों की मदद की जाए।
शांतिदूत कबूतर भी हुए आतंकी हमले के शिकार

ताज पैलेस में हुई गोलीबारी और मुठभेड़ को इन कबूतरों ने बहुत नज़दीक से देखा और झेला।
कूड़े से बनी खाद, कॉलोनी हुई हरी-भरी

चार महीने में प्रभाष की सोसाइटी के कूड़े से काफी मात्रा में खाद बन चुकी है।
किसान ने खुद बनाया सिंचाई के लिए बांध

रतन सिंह चौधरी ने ख़ुद ही बांध बना कर अधिकारियों को मुंह तोड़ जवाब दिया।
सड़क चौड़ीकरण के लिए नियम-कायदे ताक पर

लियो और उनके साथियों ने मिलकर एक आंदोलन छेड़ दिया है जिसका नाम है hasiru-usiru greenery।
लिओपॉल्ड कैफे पर उम्मीद की रोशनी

137 साल पुराना ये कैफे हर उम्र, हर तबके के लोगों का ठिकाना है।
























