विकलांग होने के बावजूद हौसले में कमी नहीं
सिटीजन जर्नलिस्ट के इस एपिसोड में उन लोगों के बारे में बताया जा रहा है। जो कि शरीरिक रूप से पूर्ण नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी कमी पर कभी रोया नहीं। उन्होंने उसी कमी को अपना हथियार बनाया और अपना एक मुकाम बनाया। यही नहीं, वो आज उन लोगों की लड़ाई लड़ रहे हैं जो कि उन्हीं की तरह असहाय हैं।
सड़क पर जीते बच्चों को ले राजीव की अनोखी मुहिम

1988 में इंटर की पढ़ाई के दौरान राजीव ने स्टेशन पर कूड़ा बीनने वाले बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।
मिड डे मील के नाम पर स्कूली बच्चों पर अत्याचार

सचिन ने बताया कि किस तरह सरकारी स्कूलों में बच्चों के साथ अत्याचार किया जा रहा है।
खबर देख बाल मजदूरों की सुध ली मंत्री जी ने

चिल्ड्रन डे के मौके पर प्रतीक ने इन बच्चों से उनकी जिंदगी का हाल पूछा।
किसानों की बंजर भूमि से अफसरों की जेब हरी

पेड़ तो ज़रूर लगाए गए लेकिन उसके बाद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
10 हजार लोगों के सिर पर लटकी है मौत

ये हाई टेंशन वायर 11 किलो वॉट की लाइन है जो लोगों की छतों से होकर गुजरती है।
दिल्लीः नाले ने घोला मयूर विहार की हवा में जहर

नाले से निकलने वाली जहरीली गैसें इतनी तीखी हैं कि ये लोहे की धातु को गला सकती हैं।
'बच्चे मासूम होते हैं उनसे बचपन मत छीनो’

ऐसे बच्चों की कहानी जिनकी हिम्मत और कोशिशों ने बदलाव की एक कहानी लिखी है।
बच्चों ने पानी बर्बादी रोकने की मुहिम चलाई

नल खराब होने की वजह से हजारों लीटर पानी नालियों में बह जाता है।
’बच्चे मुश्किलों में भी विचलित नहीं होते’ 

बच्चे जब वो ठान लेते हैं तो बड़े-बड़े कारनामे कर दिखाते हैं।
कूड़ाघर में तब्दील होतीं कोलकाता की सड़कें

इलाके में हर 100 मीटर के दायरे में तीसरा कूड़े का ढेर है।
दिल्ली के सरकारी अस्पताल इतने गैर-जिम्मेदार क्यों?

अस्पतालों से इलाज के बदले जानलेवा बीमारी मिल जाए तो मरीज़ कहां जाएं।
झुग्गीवासियों के लिए इंडिया गेट पर मार्च 

लोगों ने मिलकर एक कैंडल मार्च निकाला जो इंडिया गेट पर जा कर खत्म हुआ।
अतिक्रमण के खिलाफ उठी आवाज को दबाने की कोशिश 

ट्रैफिक की इस समस्या को देखते हुए यहां के लोगों ने एएसआई से शिकायत की।
रंग लाई हरीश की मेहनत, मिला इंसाफ

हरीश की पहल रंग लाई है और एक हफ्ते के अन्दर उनकी शिकायतों पर कार्रवाई हो गई।
बधिरों के ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अरुण की मुहिम

अरुण के दोस्त रजत रोज ऑफिस जाने के लिए ऑटो करते हैं।
सुरक्षित सफर के लिए मुकुल जोशी बने ट्रैफिक बाबा

अब लोग मुकुल को जैसे ही देखते हैं वो अपनी सीट बेल्ट और हेलमेट पहन लेते हैं।


























