सोमवार, नवंबर 24, 2008 18:02s
सर्दी की नर्म धूप और....
अपने एयर कंडीशन्ड ऑफिस की कांच की बंद खिड़की से आज झांक कर बाहर देखा..तो अचानक दिल बैठ सा गया। एक पल के लिए अपना सारा बचपन आंखो के सामने घूम गया। खिड़की से देखा आज सर्दी की नर्म धूप खिली हुई है जिसे देख तो पा रही हूं...महसूस नहीं कर सकती। इस धूप ने सालों पहले के रिश्तो की गर्माहट याद दिला दी। एक छोटा सा शहर झांसी...झांसी में एक छोटी सी कॉलोनी में एक छोटा सा घर था हमारा। क़ॉलोनी में एक छत थी जो किसी एक की नहीं, सबकी थी। सर्दी की दोपहर, खाना छत पर ही खाया जाता था। हर तरफ चटाई बिछी हुई, मां और पड़ोस की आंटिया। कोई संतरे छील कर हमें खिला रहा है तो कोई अमरूद। हम बच्चे अपनी मस्ती मे डूबे हुए। कभी गुट्टे खेलते थे तो कभी मां के हाथ से छीन कर, स्वेटर की एक आधा सिलाई...
पोस्टेड ऋचा अनिरुद्ध at 18:02 PM 18 कमेंट्स
बुधवार, अक्टूबर 15, 2008 14:10s
नया सफर नई उम्मीदें
'जिंदगी लाइव' का दूसरा सीज़न शुरू हो रहा है। पिछले एक साल में ये शो एक शो न रहकर हम सबकी ज़िंदगी का एक हिस्सा बन गया। अगर मैं ये कहूं कि 'ज़िंदगी लाइव' की वजह से हमने एक साल में जितना देखा, सुना, समझा और सीखा उतना अब तक की हम सबकी जिंदगी में नहीं हुआ था तो ये कतई अतिश्योक्ति नहीं होगी। मैंने अपने एपिसोड प्रोड्यूसर्स को अपने एपिसोड से जुड़े लोगों के लिए रोते हुए देखा है...उनके लिए दुआएं मांगते देखा है...उनके परिवारों का हिस्सा बनते हुए देखा है। हम इस शो पर सिर्फ काम नहीं करते, दिन-रात उसको जीते हैं, तभी ऐसे वाकये होते हैं जो खुद हमें भी चौंका देते हैं। मेरी एपिसोड प्रोड्यूसर नीतू एक बार तोहफे में देने के लिए भगवान शंकर की मूर्ति खरीदने गई। दुकानदार जब मूर्ति को पैक करने लगे तो नीतू ने सिर्फ इतना कहा कि...
पोस्टेड ऋचा अनिरुद्ध at 14:10 PM 41 कमेंट्स


























