शनिवार, दिसंबर 20, 2008 19:19s

दिल्ली में दिल चाहिए

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जब मैं छोटा था तो दिल्ली के बारे में तीन चीजें सुनी थीं- दिल्ली गए हैं बिल्ली लाने, दिल्ली दूर नहीं और दिल्ली दिल वालों की। यहां मैं यही कहना चाहूंगा कि दिल्ली बहुत दूर है और दिल्ली नहीं दिल वालों की। शायद मेरे कई मित्र मेरी इस बात से इत्तेफाक न रखें पर मुझे इस बात का कोई अफसोस नहीं। मैं वही लिख रहा हूं जो मैंने यहां देखा है। सबसे पहले मैं यहां आया था कुछ सालों पहले सिविल की तैयारी करने। आप लोगों को बता दूं यूपी-बिहार में सिविल सर्विस का बड़ा क्रेज रहता है मां-बाप को लगता है कि उसके बेटे को सिर्फ कलेक्टर ही बनना चाहिए, इससे कम पर कोई समझौता नहीं। तो मैं आपको बता रहा था कि मै यहां सिविल की तैयारी के लिए आया था- हम लोगों की ओर एक ट्रेंड है कि आपको आपका सीनियर ही गाइड...

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सोमवार, दिसंबर 01, 2008 12:51s

हम जागते रहे-लोग मरते रहे

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29 नवम्बर 2008 की रात मेरे जीवन की सबसे लम्बी रात रही- लम्बी इसलिए क्योंकि मैं पूरी रात सो नहीं सका। आज मैं एक ऐसी घटना के बारे में लिखने जा रहा हूं जिस पर मैं रो चुका हूं। मैं अपने आपको एक ऐसा इंसान समझता था जो जीवन की हर घटना को विचलित हुए बिना जी सकता है। लेकिन आपको सबको बता दूं कि मैं एकदम गलत था। कल सुबह सात बजे जब मैं अपने ऑफिस आया तो मैंने देखा कि प्रबल सर बिना बुलटप्रूफ के ताज के सामने से रिपोर्टिंग कर रहे हैं, उनकी आंखों के नीचे की सूजन साफ कह रही थी कि अपनी पूरी टीम के साथ वो कितनी मुस्तैदी से जुटे हैं। सबके कहने के बाद भी उन्होंने बुलटप्रूफ जैकेट नहीं पहनी। लेकिन रोना तब आया जब इस घटना की एंकरिंग कर रहे संजीव सर ने मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के बलिदान पर मां के वात्सल्य...

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मंगलवार, अक्टूबर 14, 2008 13:30s

क्रिक्रेट धर्म और बाजार के शिकार सौरव

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फैबुलस फोर के सदस्य सौरव गागुंली मौजूदा भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिक्रेट को अलविदा कह देंगे। इस ऐलान से भारतीय क्रिक्रेट के एक आक्रामक खिलाड़ी के एक अध्याय का अंत हो गया। लगा कि सब कुछ सामान्य ही है। एक खिलाड़ी के खेल कैरियर का अंत तो होता ही है। लेकिन इस ऐलान का असली खेल तो तब सामने आया जब सौरभ ने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में आरोपों की झड़ी लगा दी। इसके बाद तो भारतीय क्रिक्रेट में मानो तूफान आ गया हो- एक बात जो सामने आई वो ये कि क्रिक्रेट को अलविदा कहने का कारण उम्र नहीं है- बल्कि उसके कई खलनायक भी हैं। दादा के कैरियर पर नजर दौड़एं तो हमें एक शानदार आंकड़ा दिखता है। बंगाल टाइगर ने 109 टेस्ट मैच की 180 पारियों में 15 बार नाबाद रहते हुए 6888 रन बनाए हैं। टेस्ट मैच में गांगुली के 41.74 औसत...

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गुरुवार, अक्टूबर 02, 2008 15:58s

गांधी विचार आज भी प्रासंगिक हैं

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आज गांधी जयंती है और इसके लिए आप सबको ढेरों बधाई। राष्ट्रपिता के जन्म दिवस के मौके पर ये जानना जरूरी होगा कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवन को मानव समाज और देश को समर्पित कर अहिंसा की ताकत का मूल्य समझाया आखिर उसकी सोच, दर्शन और सिद्धान्त क्या थे, समाज रचना की तकनीक क्या रही होगी, उसका सत्याग्रह कितना प्रासंगिक रहा होगा। इन सब को जानने के लिए सबसे पहले हमें गांधीवाद जैसे शब्द से बचना होगा क्योंकि वाद में जड़ता होती है। इसके लिए गांधी विचार को जानना जरूरी होगा, क्योंकि विचार दर्शन से प्रवाह हुआ करता है और गांधी दर्शन के मूल में आपको सत्य, अहिंसा, सादगी अस्तेय, अपरिग्रह, श्रम और नैतिकता मिलेगी- जहां से स्थानीय स्वशासन, स्वावलम्बन, स्वदेशी विकेन्द्रीकरण, ट्रस्टीशिप परस्परावलम्बन, सहअस्तित्व, शोषणमुक्त व्यवस्था और सहयोग, सहभाव एवं समानता पर आधारित जागृति ढांचे का अभ्युदय होगा। किसी से भी पूछने सबसे पहले यही...

पोस्टेड पुनीत शुक्ला at 15:58 PM     8 कमेंट्स

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