शनिवार, दिसंबर 06, 2008 19:18s

इस हमले का मास्टरमाइंड कौन है?

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रात के दस बजे थे। अचानक फोन की घंटी बजी। अनमने से फोन उठाया। लेकिन फोन पर बात सुनते ही होश उड़ गये। उधर से कहा गया कि मुंबई में कई जगह पर फायरिंग की खबर है। आंतकवादियों ने काफी बड़ा हमला बोला है। आनन-फानन में रिपोर्टर्स को मोबलाइज किया गया। ओबी वैन को स्पॉट पर पंहुचाने की कोशिश में पूरा न्यूजरूम लग गया। चैनेल लाइव था। हमारे संवाददाता जेपी फोन पर खबर दे रहे थे। एंकर ने सवाल किया। कैमरा हवा में घूमा और कुछ पल के लिये टीवी ब्लैक हो गया। ग्रेनेड हमारी कैमरा टीम के पास ही फटा था। पूरे न्यूज रूम में सन्नाटा...एंकर ने पूछा, जेपी...जेपी। आवाज नही आयी। अनिष्ट और आंशका से दिल बैठ गया। न्यूज रूम और एंकर के सामने अंधेरा सा छाने लगा। एंकर ने फिर जेपी का नाम पुकारा। उधर से दो सेकेंड तक आवाज नहीं आयी। आशंका सच साबित होती दिखी।...

पोस्टेड आशुतोष at 19:18 PM     37 कमेंट्स

गुरुवार, नवंबर 06, 2008 19:42s

आज की रात...यस वी कैन

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आज की रात कुछ लिखने को दिल करता है. आज की रात कुछ कहने को दिल करता है . आज की रात कुछ भी नहीं करने को दिल करता है. आज की रात इतनी पूरी है कि कुछ और सोचने को मन नहीं करता है . आज की रात उम्मीदों की रात है. आज की रात बची रहे मेरे सपनों में ये दुआ खुदा से मांगने को दिल करता है. आज ओबामा ने चुनाव जीता है. आज की रात एक सपना जवान हुआ है. आज की रात सपने को भी सपना आया है. आज की रात कहती है अगर कभी ज्यादा भी सोचा होता तो पूरा होता. आज की रात एन निक्सन कूपर की जिंदगी की सबसे खूबसूरत रात है. आज 106 साल में वो पहली बार चैन की नींद सोयेगी. आज की रात शायद वो सोये ही न क्योंकि आज की रात वो सोचती है कि कभी खत्म...

पोस्टेड आशुतोष at 19:42 PM     14 कमेंट्स

गुरुवार, अक्टूबर 30, 2008 17:05s

सचिन और मेरी जिंदगी का चौराहा

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जिंदगी के चौराहे कभी-कभी एक नये चौराहे पर ला खड़ा करते हैं जहां से आगे का रास्ता दिखता तो है लेकिन जाना कहां है ये पता नहीं होता। और शायद जिंदगी की खूबसूरती भी इसी में है कि ये हमेशा या तो सूली पर टंगी रहती है या फिर चौराहे पर अटकी रहती है। पिछले दिनों जब मुझे ये लगने लगा था कि जिंदगी अब चौराहे और सूली की सीमा से बाहर निकलने लगी है और सामने सीधा पाक रास्ता नजर आ रहा है तभी एक नये अनुभव ने मुलाकात की। इस अनुभव का नाम और एहसास के बारे में पूछेंगे तो शायद थोड़ी झिझक हो, मामूली संकोच भी। पर अब चूंकि बात खुल ही रही है तो बताने से क्या परहेज। इस अनुभव का नाम है सचिन तेंडुलकर और एहसास का जरिया बना ब्लॉग की तिलस्मी और बेबाक दुनिया। एक वर्चुअल वर्ल्ड। जहां जितना उजाला है उतना...

पोस्टेड आशुतोष at 17:05 PM     7 कमेंट्स

शुक्रवार, अक्टूबर 24, 2008 17:25s

सचिन महानतम नहीं हैं

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किसी ने मुझसे पूछा था कि क्या सचिन भारत के महानतम बल्लेबाज हैं ? मैंने कहा -"नहीं," सज्जन ने पूछा "क्यों ?" मैंने कहा- "इसके हजारों कारण हो सकते हैं ।" मैं जानता हूं कि मौजूदा माहौल में ये कहना सही नहीं होगा और लिखना तो और भी खतरनाक, लेकिन जो मुझे जानते हैं , और मुझसे बातचीत करते रहे हैं, वो जानते हैं कि मैं ये लंबे समय से यही बात कहता रहा हूं। और इस वजह से अकसर मुझे लोग अजीब नजरों से देखते रहे हैं , कुझ नाराज हो जाते हैं तो कुछ मुझे बेवकूफ समझते हैं। लोग अकसर तर्क देने लगते हैं। कुछ फौरन कहते हैं जब सर डॉन ब्रेडमैन कह चुके हैं कि सचिन मेरी तरह खेलते हैं तो बकवास करने वाले तुम कौन हो। यहां तक महानतम गेंदबाज शेन वॉर्न ने भी उन्हें अपनी लिस्ट में सबसे ऊपर रखा है। लोग...

पोस्टेड आशुतोष at 17:25 PM     17 कमेंट्स

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