सोमवार, जनवरी 03, 2008 19:40s

क्योंकि हिमेश चापलूस नहीं है...

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दोस्तो, हिमेश रेशमिया होने का मतलब क्या है .....आप कुछ जवाब दें उससे पहले मैं आपको बताता हूं। जो मैंने देखा, सुना और महसूस किया ,अगर उसे कसौटी मानूं तो जितने लोग हिमेश रेशमिया को पसंद करते हैं ,उससे ज्यादा उन्हें नापसंद करते हैं ....पिछले कुछ वक्त में मैंने एक बात और नोटिस की ...सर्वे चाहे किसी भी चीज का हो, अगर उसमें एक सवाल ये हो कि, वो कौन सा गाना है जिसे आप नहीं सुनना चाहेंगे -तो यकीन मानिए ज्यादातर जवाब आएंगे-हिमेश रेशमिया के गाने। वैसे हिमेश होने के कुछ और भी मतलब हैं - मसलन ,वो शख्स जिसे ,आशा भोंसले ने थप्पड़ मारने की बात कही थी....वो शख्स जिसकी गायकी पर हर वक्त ये कहकर सवाल उठाए गए -\'अरे ये तो नाक से गाता है\' ।....आज के दौर में हिमेश होने का शायद यही मतलब है...मेरी बातें सुनकर हो सकता है आप इनसे असहमति जताएं...लेकिन अगर आप...

पोस्टेड बृज दुग्गल at 19:40 PM     11 कमेंट्स

सोमवार, सितंबर 29, 2008 20:32s

यूं मरने के लिए नहीं हम हिंदुस्तानी

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हम कहते रहें, उन्हें फर्क नहीं पड़ता, हम चिल्लाते रहें, उनकी बला से ...हमारी लाशें गिरती रहें, उन्हें कुछ लेना देना नहीं....हमारा खून सड़कों पर बहता रहे, उन्हें क्या -उनके लिये तो हमारे खून की कीमत पानी से भी कम है ....बात चाहे अहमदाबाद बलास्ट की हो या जयपुर धमाकों की...दिल्ली में हुए धमाके हों या असम का सीरियल बलास्ट ....हमारी जान की कीमत, हमारे नेताओं के लिए छींक आने से ज्यादा कुछ नहीं....असम में 30 अक्तूबर को हुए सीरियल धमाकों में भले ही 60 से ज्यादा की जान चली गई हो...भले ही 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए हों, लेकिन यकीन मानिए कोई फर्क नहीं पड़ेगा ...सबकुछ वैसे ही चलता रहेगा ...और हां, एक बार फिर मैं आपसे कहता हूं-आप भी कभी भी शिकार बन सकते हैं। मानसिक रूप से खुद को तैयार कर लिजिए। बहुत मुमकिन है एक बार फिर आपके शहर में ब्लास्ट हो...

पोस्टेड बृज दुग्गल at 20:32 PM     9 कमेंट्स

बुधवार, अगस्त 20, 2008 21:49s

हिंदुस्तान जवान हो गया ....

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हिंदुस्तान जवान हो गया है ....ये यंग इंडिया है ....ये वो भारत है जहां गांव से, छोटे शहरों से अपने बूते ,झंडे गाड़े जा रहे हैं । चाहे वो आज के हिंदुस्तान का अर्जुन ,निशानेबाजी में गोल्ड मेडल जीतने वाला अभिनव बिंद्रा हो। कुश्ती में कांस्य जीते वाले सुशील कुमार हो या फिर मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीतने वाले विजेंद्र कुमार। सबने अपने दम पर जीत हासिल की है। कामयाबी के आसमान पर चमकने वाले ये वो सितारे हैं जो खुद तो कुछ नहीं बोलते लेकिन उनकी सफलता ताल ठोंककर कहती है- हां ,हममें है दम। हम आज के हिंदुस्तानी हैं। हम किसी से नहीं डरते। हम हारने से बचने के लिए नहीं खेलते । हम जीतने के लिए खेलते हैं। हमें हार से डर नहीं, लेकिन हमें जीत से मोहब्बत है। बात चाहे क्रिकेट की हो या निशानेबाजी की या फिर मुक्केबाजी की । इस यंग इंडिया...

पोस्टेड बृज दुग्गल at 21:49 PM     5 कमेंट्स

शुक्रवार, जुलाई 11, 2008 18:07s

होशियार सीबीआई और बेवकूफ हम

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आरुषि का कत्ल और कत्ल के बाद के 57 दिन। पिछले 57 दिनों से लगातार हम आपको आरुषि के बारे में बता रहे हैं लेकिन आज सबसे पहले हम आपसे एक सवाल पूछना चाहते हैं। क्या ये मुमकिन है कि एक कमरे में आपकी बेटी का कत्ल हो रहा हो और आप दूसरे कमरे में आप सोए रहें? आपको क्यों नहीं पता चला इसकी दलील ये दी जाए कि कमरे में चल रहे एसी की आवाज इतनी तेज थी कि आपको अपनी ही बेटी की चीख सुनाई नहीं दी। रुकिए... जवाब देने की जल्दबाजी मत कीजिए... एक और सवाल... क्या ये मुमकिन है कि आपकी बेटी को कत्ल कर घर से जा चुके कातिल फिर लौट आएं और अबकि बार वो बेसुध पड़ी उस मासूम पर फिर से वार करें। यानी आप सोते रहें और वो बडे ही इत्मीनान से आपकी बेटी पर दो-दो बार वार करें। भला कौन यकीन...

पोस्टेड बृज दुग्गल at 18:07 PM     14 कमेंट्स

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