खालिद हुसैन
कोरसपोंडेंट
प्रीविअस पोस्ट

शुक्रवार, अगस्त 21, 2009 18:03s
PDP के बाउंसर पर उमर का सिक्सर
विधानसभा का इजलास जिस तरह से हुआ उससे ज़ाहिर होता है कि पीडीपी ने पहले से ही यह फैसला किया कि हुक्मरान इत्तहाद (गठबंधन) को हिला कर रख देगी और ऐसा बोहरान (हालात) पैदा कर देगी कि दिल्ली को भी सोचने पर मजबूर होना पड़ेगा। इस तरह कांग्रेस के लिए कोई चारा ही नहीं रह जाएगा सिवाए इसके कि वो नेशनल कॉन्फ्रेंस का साथ छोड़ कर फिर से पीडीपी के साथ अपना नाता जोड़ ले।
इसलिये बहुत सोच-समझ कर एक ऐसा मामला चुना गया था जिसकी शिद्दत बजाहिर ख़त्म हो चुकी थी और जो तक़रीबन कश्मीरियों के दिमाग से उतर चूका था लेकिन इसके बावजूद यह मामला बहुत हिस्साफ (संवेदनशील) है और कश्मीरी ऐसे मामलों पर भड़कने की रिवायत रखते हैं और इस मामले पर अगर भड़क जाते तो बात बहुत दूर तक जाती।
सेक्स स्कैंडल कश्मीर और कश्मीरियों के लिए काफी अहम मामला रहा है। पीडीपी ने बहुत सोच-समझ करके इस मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को मुलव्विज (शामिल) बताने का मंसूबा बनाया जिन लोगों ने मंसूबा तैयार किया होगा उन्हें पूरा यकीन था कि विधानसभा में यह मामला उठते ही पूरे कश्मीर में आग भड़क जाएगी और नेशनल कॉन्फ्रेंस की 6 महीने पुरानी सरकार लड़खड़ा कर गिर जाएगी। लेकिन इस मंसूबे में बहुत बड़ी खामी ये रही कि जिस पर इल्जाम लगाया गया उसके किरदार पर अभी तक एसा कोई दाग नहीं है और जो इल्जाम लगा रहा था उसके दामन पर ऐसे कई दाग का इल्जाम है। मुख्यमंत्री ने इल्जाम सुनते ही इस्तीफा देकर पीडीपी के मंसूबों पर पानी फेयर दिया।
आखिर उमर अब्दुल्ला इस इल्जाम से पूरी तरह बरी हो गए। अहम बात यह कि इस इल्जाम का लोगों में भी कोई असर नहीं हुआ। लोगों ने सुनकर अनसुनी कर दी यानी उन्हें यह इल्जाम कबूल नहीं था। इस तरह पीडीपी का वार पलट गया और मुख्यमंत्री के लिए उन्होंने जो रुसवाई का मंसूबा बनाया था वह उसकी अपनी रुसवाई बन गया। पीडीपी को इस को इस कदम से जो धक्का लगा उसे शायद वो कभी न भुला पाएगी। इससे साबित हुआ कि वो इख्तदार (सत्ता) हासिल करने के लिए कुछ भी कर सकती है इसके लिए किसी भी हद तक गिर सकती है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस को पीडीपी के इस ड्रामे से जो राजनीतिक फ़ायदा हुआ वो शायद उसे कभी नहीं होता। उमर अब्दुल्ला की पोजीशन इससे मजबूत हुई ओर उसकी जात (पर्सनैलिटी) और सरकार को लोगों का ऐत्माद हासिल हुआ लेकिन राजनीतिक दलों के फायदे और नुकसान से विधानसभा के कई दिन ज़रूर जाया हुए और जनता का बड़ा नुकसान हुआ।
इसके लिए जो जिम्मेदार है वो जनता के कटघरे में मुजरिम है और जनता उन्हें इसकी सजा ज़रूर देगी। क्योंकि सदन कोई जंग का मैदान नहीं है। यह वो जगह है जहां आम जनता के मसले उठाए जाते हैं और उन पर बहस की जाती है और अगर कोई राजनीतिक दल ऐसा करने से बचे और सत्ता की ज़ंग लड़ने सदन में जाए जो जनता का सब से बड़ा दुश्मन है। क्योंकि सदन के एक दिन की कार्यवाही पर जनता का भारी सरमाया खर्च होता है और जो जनता के हमदर्द होंगे वो इसकी कद्र करेंगे...
पोस्टेड खालिद हुसैन at 18:03s 3 कमेंट्स
टोटल कमेंट्स
पोस्टेड बी msbohra
मुफ़्ती मोहमम्मद एक देशद्रोही इंसान है ये हमएसा कोई न कोई साद्यंत्र ही करता रहता है.दिल्ली मे ग्रह-मंत्री बने तो बेटी को अगवा करा दिया ओर आतंकवादियो को छुड़वा दिया,जनता भूली नही है अबतक.कॉंग्रेस ने पीचली सरकार इनके साथ सज़ा चलाई जबतक मुखामंत्री पद इनका रहा सरकार चलती रही जब ग़ुलामनबी आज़ाद मुखामंत्री बने तो वाकफ बोर्ड को ज़मीन देने का मुद्दा एसा बनाया की ग़ुलामनबी को इस्तीफ़ा देना पड़ा.ये बाप ओर बेटी दोनो बेगेरत ओर बेअमान पसंद लोग है अगर कश्मीरियो को अपनी तरक्की करनी है,अपनी ओलादो को अच्छा भविषय देना है तो एसए लोगो को जड़ो से उखाड़ फेके.अब इन्होने जो कम किया वो तो इतना गंदा है की उसी गंदगी मे वो सारॉबार हो गये अब इसकी दुर्गन्द पूरे विशव मे फेल गयी है. ...
पोस्टेड बी sharad saxena
महबूबा मुफ़्ती जी और उमर अब्दुल्ला जी दोनो एक ही तेली के चट्टे बट्टे हे हुर्रियत आज तक अपनी कोई दमदार राजनीतिक पहचान नही बना पाई हे ....अब कश्मीरियो की मजबूरी हे की उनको उपलब्ध विकल्पो मे से %22कम घटिया कौन%22 का चुनाव करना हे......महबूबा मुफ़्ती जी को किसी भी चॅनेल पर मैने हर बार सिर्फ़ वाहियात बातो पर गला फाड़ कर हल्ला मचाने के सिवा और कुछ करते नही देखा ...






























पोस्टेड बी amit dogra
आरे हमे इन देश के दुश्मनो से बच के रहना चाईए आसे ही लोग है यो देश हिस्से करवाते है आरेहमे इन देश के दुश्मनो का मुक़ाबला करना चाईए और बचना चाईए इन गद्डारो से ...
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