Satya Narayan Place : Sonebhadra |
हमारा समाज पैसो का इतना भूखा हो गया है की इंसानियत तुच्छ हो गई है. संत माहातमाओं के उपदेश व्यर्थ लगते हैं. अपनी मेहनत सेअपना पराप्य प्राप्त करे, अँव ख़ुद के प्रति ईमानदर रहें चरित्र और नक़ाब पहने लोगों से उम्मीद न करें.
( Posted: Sunday , November 30, 2008 at 08:16 )
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sachin Place : Delhi |
ई डोन'ट उँदेरस्थांद व्हत दो उवँ वंत तो सय? पलेआसे प्रेसिसे मदम. हूँको नही लगता की सभी पग'स एक जैसे होते है. अक्तुअल्लय आप अपना ग़ुस्सा निकाल रही हो
( Posted: Tuesday , November 25, 2008 at 18:04 )
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himmat singh rathore Place : jaipur |
यह सही है
( Posted: Friday , November 21, 2008 at 11:05 )
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harshant Place : karnal |
एस तेसे डायस इतस ंपट ए
( Posted: Tuesday , November 04, 2008 at 16:22 )
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jasvinder Place : bareilly |
पूजा जी आपने ब्लोग तो काफ़ी आचा लिखा है , लेकिन कहीं ना कहीं आप अपना ग़ुस्सा निकल री हैं, ब्लोग में सभी बातें संतुलित लिखनी चाहिए , आचा प्रयास है आसा करता हू की अगली बार आप ये ध्यान मैं लाएगी सुभ कामानाओं सहित
( Posted: Thursday , October 23, 2008 at 22:41 )
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Abhishek nair Place : Raigarh |
आप ने बहुत ही अक्चा विसय चुना है और दूसरे लोगो को अपनी पारेसनी से रूबरू कराया है
( Posted: Thursday , October 23, 2008 at 06:47 )
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Bn. Kaushik Place : UP West |
पूजा जी स्पष्ट नही हो रहा की आप कहना क्या चाह रही हें ये तो स्पष्ट है की घर जैसा आराम आप को फ़ाइव स्टार होटल में भी नहीं मिलेगा किराए के मकान में रहना और ख़ुद के मकान में रहना अंतर तो रखता ही है जहाँ तक लेंड लोर्ड का सवाल है वो अलग अलग प्रकर्ती के लोगों के स्वभाव पर निर्भर करता है कुछ लोगों को अच्छा अनुभव होता है तो कुछ को दुखद लेकिन ये सच है लेंड लोर्ड तो लेंड लोर्ड ही रहेगा अच्छा यही होता है की लेंड लोर्ड के नियम विशेषों का पालन किया जाए जब तक की प्राईवेसी भंग ना हो और जो लेंड लोर्ड आपके ख़ान पान पर भी इनटेरफ़ीयर करे तो बेहतर होगा की हम स्थान बदल लें जेसे ख़राब होटल अच्छा ना होने पर ज़रूरी नही की हम उसमें रहें जब पैसा ख़र्च कर रहे हें तो वहीं रहेंगें जहाँ सुविधा मिलेगी दीपावली की शुभ कामनायों के साथ आशा है की आप मेरे विचारों को सहज रूप से लेंगी... सुख-द्धुख दोनों रहते जीवन है वो गाव ...कभी धूप तो कभी छ्हों
( Posted: Thursday , October 23, 2008 at 01:55 )
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देआर पूजा मई आपकी बातो से सहमत हूँ ब्ट आप येह भी तो देखो की घर जैसा आराम अगर बाहर मिल जाए तो फिर अनतेर ही क्या रह जाएगा
( Posted by sanjay gupta on Saturday , October 25, 2008 at 14:11 )
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