NITIN GUPTA Place : JALANDHAR |
मेरा भारत महान 100 में से 99 बाइइमान ये पंक्ति हमारे देश के स्यस्टें में बिल्कुल सही फ़िट होती है शायद जब हमारे देश में कोई प्राकृतिक आपदा आती है तो हमारे नेता ओर अफ़सर फ़ुले नही समाते क्योंकि तब सिलसिला शुरू होता है पूरे देश ओर विश्वा से मदद का आना ओर वो भी पैसो के रूप में खाने के रूप में लेकिन वो सब आता है उनके लिए जो इन आपदाओ का शिकार हुए है लेकिन उन तक तो ये सब मदद पहुँचती ही नही है उन्हे तो अपने समान लेने के लिए ख़ुद पैसे देने पड़ते है उसके बाद भी गरीमत है के उन्हे मदद मिल जाए. जैसा की मनीष सर ने कहा में उनसे सो फ़ीसदी सेहमआत हू पर हम सुधार नही सकते आज़ादी से पेहले हमे अँग्रेज़ो ने लूटा ओर अब अपने ही नेता ओर अफ़सर अँग्रेज़ो के रह पर चल रहे है आम आदमी तो 60 साल पेहले भी ग़ुलाम था ओर आज भी है ( नितिन गुप्ता, स्टूडेंट ओफ़ ज़ौरनलिस्म, एल, पी, यू)
( Posted: Monday , December 01, 2008 at 20:50 )
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amit kuamar Place : bhopal |
आपने बिल्कुल सही कहा मनीष जी, जो आपने लिखा है वो शत प्रतिशत सही है सारी जानकारी पड़ने के बाद ऐसा लगता है की जीतने भी अधिकारी हैं उनके खिलाफ़ करवाही करना छाई
( Posted: Monday , November 03, 2008 at 16:39 )
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वसीम अब्बासी Place : नई दिल्ली |
मनीष जी जो आपने लिखा वो सही है... क्योंकि जब कोसी मय्या ने बिहारवासियों पर कहर ढाया था तो उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री प्रिय मनमोहन जी ने 1000 करोड़ रुपये राहत कोष के लिए दिए थे। ये इतनी बड़ी रकम है जिससे 1000 शख्स अमीर तब्के में शूमार हो सकते हैं..जिससे पूरे बिहार के लिए साल भर के अनाज का इंतज़ाम किया जा सकता है.. जिससे लाखों लोगों को छत नसीब हो सकती है.. लेकिन अभी तक बिहार के लोग बाढ़ के कहर से उभर नहीं पाये हैं ऐसे में ऐसे राहत के नाम पर लूट ही कहा जा सकता है
( Posted: Monday , November 03, 2008 at 13:34 )
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kumarvimalwa Place : delhi |
मनीष जी की लेखनी में दम है.. बिहार में बाढ़ के नाम पर लूट का धंधा सही चल रहा है.. मनीष जी कृप्या करके न्यज़ चैनल में भी ऐसी ख़हरें चलवायें...
( Posted: Friday , October 24, 2008 at 12:37 )
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मनीष पंत Place : दिल्ली |
बिहार में बाढ़ की जब पहली खबर आई तो ये पता चला कि आज़ादी के 61 सालों के बाद भी भारत में कई जगह मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बाढ़ से जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका था और अब जब ये पता चला कि राहत के नाम पर अधिकारियों ने लूट मचा रखी है तो मैं काफी हैरान हुआ, ऐसी ही कुछ खबरें जब सुनामी आई थी तब भी हुई थीं कि प्रभावित लोगों के साथ लूटपाट हुई थी। कम से कम इस बात को तो ध्यान में रखना चाहिए कि ऐसा हमारे साथ भी हो सकता है, लेकिन इस बात की चिंता हमें कहां, हमें तो बस अपनी जेबें गरम करने से मतलब है चाहे किसी का घर उजड़े या फिर किसी को मौत भी आ जाए। खैर आपको बस यही बोलना चाहुंगा कि बहुत अच्छे दोस्त, तुम्हारे इस लेख से शायद ही सही लेकिन कुछ तो बदलाव की उम्मीद है।
( Posted: Friday , October 24, 2008 at 12:33 )
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tpod Place : badnam na karo |
"राहत के नाम पर लूट" लेख मैने पढ़ा. इस लेख में आप ने लूट जैसी किसी भी बात को उजागर नहीं किया है. आप स्वयम मानते हैं की पैसे सही दिए गये हैं. अनाज के बारे में आप का लिखना की दस या पंद्रह किलो क्म दिए गये. पत्रकार होने के नाते आप ज़रा और तह तक जाते. ग़लत करने वालों में क्म से क्म कुछ को पकड़वाते तो लगता की एक पत्रकार बोल रहा है.
इस तरह यह बात बिहार को पूर्वाग्रह से हमेशा बदनाम करना उचित नहीं है. भ्रष्टाचार तो सिर्फ़ बिहार ही क्यों सारे हिंदुस्तान में फल-फूल रहा है. आप की गंभीरता तब महसूस होती जब आप अपने न्यूज़-रिपोर्ट में कुछ तथ्यों का समावेश करते.
( Posted: Friday , October 24, 2008 at 01:53 )
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पुनीत शुक्ला Place : delhi |
मनीष ये पढ़कर काफी अच्छा लगा कि आप भी इस प्रकार की सोच रखते हैं ...मैं अब तक आपको सिर्फ स्पोर्ट्स के पत्रकार के रूप में ही जानता था। आपका ये प्रयास काफी अच्छा है
( Posted: Thursday , October 23, 2008 at 15:00 )
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indian Place : delhi |
बिहार के ओफ़िसेरों को नाजायज़ खाने की पुरानी आदत है. होगी कियों नही सब सले नाजायज़ बाप की नाजायज़ औलाद जो है. उनका साथ देने वाला भी नाजायज़ बाप की नाजायज़ औलाद है
( Posted: Thursday , October 23, 2008 at 11:27 )
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abhash jha Place : delhi |
काफ़ी अच्छा लिखा है. काफ़ी लोग इस प्रोबलेम्म का सामना क्र रहे है. ई होपे के ये पदकेर बिहार के ओफ़फिसेर के आखे खुलेगा.
( Posted: Thursday , October 23, 2008 at 10:09 )
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