Pradumn Kaushik Place : Bulandshahr |
आशुतोष जी में आपकी इस बात से सहमत हूँ की राहुल गाँधी जो कुछ भी कर रहे हे वो बिल्कुल ठीक है ! कम से कम कोई तो नेता है जो अपनी आराम भरी जिंदगी से समय निकालकर ग़रीबो के बीच उनकीसमस्या सुन रहा है ! और अगर किसी को इससे ऐतराज है तो वो पहले खड कुछ ऐसा करे जिससे ग़रीबो का दुख -दर्द कम हो ! बाद मे राहुल जी की आलोचना करे !
( Posted: Thursday , December 10, 2009 at 13:48 )
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atul chaurasia Place : faizabad |
आशुतोष जी आप ने सही कहा ,जो काम अब तक महात्मा गाँधी के एलवा कोई और नही कर पाया और अगर उस काम को राहुल गाँधी कर रहे है तो इसमे इतनी हाय तौबा मचाने की कोई ज़रूरत नही है \ अगर कुछ करना है तो ज़मीन पर आ कर करे. ग़रीबू और दलितू की हालत जा कर देखे की उनके घरो मे कैसी हालत है ना खाना होता है ना पानी होता है और ना की इज़्ज़त होती है ऐसे मे कैसे हम एक मजबूत भारत का सपना देख सकते है,कैसे हम चाइना से लड़ने की बात कर सकते है.
( Posted: Saturday , October 24, 2009 at 17:59 )
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Rajeev Ranjan Singh Place : Bihar |
बहुत बढ़िया आशुतोष जी !!! ऐसा लगता है की आपने कॉंग्रेस और गाँधी परिवार के तारीफ़ का ज़िम्मा अपने चैनल से ही अग्रीमेंट कर लिया है......और भाजपा का खूब शिकायत करते है और जो भाजपा मे नही होता है उसको भी बढ़ा चढ़ा कर दिखाते है.....बहुत बढ़िया ....लगे रहिए ...वैसे आपका आई क्यू काफ़ी अच्छा है !!!! धन्याबाद !!!!
( Posted: Thursday , October 22, 2009 at 11:52 )
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Rafi Mohammed Shaikh Place : Indore |
वास्तव मे हम पाकिस्तान के बारे मे ओवर रिअक्ट हो जाते है. राहुल हो या फिर कोई, बस छोटी सी बात को इतना बड़ा बना दिया जाता है की जबरन की बहस छिड़ जाती है. बेहतर यह होना चाहिए की पहले हम सोचे समझे और उसके बाद कुछ कहे.
( Posted: Thursday , October 22, 2009 at 11:08 )
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Harendra Singh Place : Ghaziabad |
राहुल गाँधी ने पाँच मिनिट का समय ज़्यादा कह दिया पाकिस्तान के लिए सिर्फ़ पाँच सेकेंड बहुत हैं
( Posted: Tuesday , October 20, 2009 at 17:17 )
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msbohra Place : india |
बहुत दिनो बाद आशुतोषजी आपने कुछ लिखा मगर फिर वही राहुल-चालीसा ओर गाँधी परिवार का महिमामंडन,राहुल जो भी कर रहे है वो एक नाटक की अच्छी स्क्रिप्ट का मंचन ही है जो सच्चाई से लाखो कोस दूर है.
चेहरे बदलते है रूप बदलते है मगर चाल वही चलते है, मोका आने पर सब कुछ छोड़ कुर्सी पाने को लपकते है.
एक मोके की पेदाइस है राहुल ओर कुछ भी नही,जिसे ये भी समज नही है की पाकिस्तान भारत मे कितना आतंकवाद फेला रहा है वो तो पाकिस्तान पर पाच मिनट भी सोचना नही चाहते,क्या दिमाग़ पाया है उनकी नज़र मे तो हज़ारो लोग आतंवाद के शिकार हुए उनके लए भी सोचने के लए पाच मिनट नही है ! क्या युवा है ये,जो देश के भावी नेता बनने के सपने पाले हुए है ओर देश के सबसे बड़े दुश्मन के बारे मे पाच मिनट भी सोचना गवारा नही करते.क्या एसए हाथो मे देश की बागडोर देना घातक नही है ?जवानी एसी है तो देश को गरत मे जाने मे समय नही लगेगा.जिस की सोच मे ही कोई गहराई नही है तो वो क्या निर्णय करेगा ओर जो करेगा वो तुगलकी निर्णय ही होंगे.ये तो हम जानते है की राहुल मे कोई निर्णय शक्ति नही है एक ग्रुप ही उनके सारे कदमो को तय करता है की वो कब क्या करेंगे ओर केसे करेंगे मीडिया को केसे उन सभी बातो को हाइलाइट करना है आदि....आदि......राहुल तो एक चेहरा है सोच किसी ओर की है,यही सच्चाई है उनकी.ये काठ की हांड़ी भी एक बार चुहले पर चॅड कर बेकार हो जाएगी.
( Posted: Tuesday , October 20, 2009 at 14:08 )
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वैसे आपने ये बिल्कुल उचित कहा की राहुल इस देश की राजनीति को नया आयाम दे र्हें हैं... इतने बड़े लोकतंत्र में जहाँ इतनी राजनीतिक पार्टियाँ हैं, वहाँ किस पार्टी के किसी नेता ने ऐसा करा है| एक कॉमेंट मे कहा गया है की ये सब पाकिस्तान जानबूझकर क्र रहा है, २६.११ के बाद जो हमले पाकिस्तान में हो र्हें हैं, उसे देखकर आप ये कतई न्हीं कह सकते | कहीं ना कहीं पाकिस्तान भी आतंकवाद का शिकार ब्ना है.
( Posted by devas dixit on Sunday , October 25, 2009 at 17:55 )
शायद m s bohra ji को सच ज़्यादा बुरा लगा है ......वो क्या समझते है की आशुतोष ने गाँधी परिवार का महिमामंडन किया है ., तो वो ग़लत है क्योकि पत्रकार का कम होता है सच को दिखाना ,,,, मेरी नज़रो मे आशुतोष बिल्कुल सही है ..........
( Posted by neeraj on Saturday , November 14, 2009 at 14:20 )
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kk Place : india |
आशुतोष ज ने सही ही कहा है राहुल गाँधी कुछ नया कर रहे है.सही है राजनीतिक पार्टियो के जो पुराने हथकंडे थे वो अब जनता समझ चुकी है इस लिए भोली भाली जनता ख़ास कर दलित और पिछड़े लोगो को कैसे बेवकूफ़ बनाया जाय उसका नया तरीका कॉंग्रेस ने खोजा है.इस काम मे राहुल गाँधी को इस लिए लगाया है की बाकी सब को तो जनता समझ चुकी है.इस से पहले मायावती ,लालू प्रसाद,मुलायम सिंग जैसो ने खूब जमकर बेवकूफ़ बनाया.क्या ग़रीबो की झोपड़ियो मे जाकर सोने खाने से उनकी समस्याओ का समाधान हो जाएगा.अगर आशुतोष जी को लगता है राहुल गाँधी उनकी समस्याओ को समझ ने जा रहे है तो ६० साल तक कॉंग्रेस क्या कर रही थी.उनकी समस्या है सविधान के मूलभूत अधिकार.उनकी समस्या है रोटी,कपड़ा और मकान.उनकी समस्या है शिक्षा और स्वास्थ्य.उनकी समस्या है सड़क ,पानी ,बिजली और रोज़गार.गाँधी जी ६० साल पहले गये थे तब सचमुच हमे ज़रूरत थी उनकी समस्याओ को नज़दीक से जानने की.ये ऐसा भी तो हो सकता है दूसरी पार्टिया चुनाव के समय इनके पास पहुचे इससे पहले ही बाजी मार लो.पहले कुछ दिया होता उसके बाद पूछने जाते आपको जो दिया वो मिला की नही.राजीव गाँधी ने जब कहदिया की हमारा दिया हुआ १ रुपये मे से १० पैसे ज़रूरतमंद के पास पहुचता है.अगर सचमुच राहुल गाँधी इस देश का भला करना चाहते है तो पहले उन्हे उस रास्ते के अंदर से गुजरन होगा जो उनके महल से झोपड़ी तक जाता है.उन्हे उन ९० पैसे को खोजना होगा जो भ्रष्टाचार के दलदल मे खो गये है.क़ानून का सम्मान और भय ,ईमानदार को इनाम और बे ईमान को सज़ा जब होगी तभी इस देश का भला हो सकता है.एक राहुल गाँधी एक झोपड़ी मे जाकर १००करोड़ लोगो का भला नही कर सकते.इसके लिए राजनीतिक पार्टियो को आपसी विद्वेष भूलना होगा.एक दूसरे के प्रति नफ़रत फेलाना बंद करना होगा और मिलकर काम करना होगा.RSS का राहुल गाँधी की प्रसंशा करना और राहुल गाँधी का नीतीश कुमार की प्रसंशा करना मीडीया के लिए (जो हमेशा एक दूसरे को लड़ा कर अपनी रोटिया सेक रहा है)आश्चरयकी बात हो सकती है लेकिन यही असली देश भक्ति है.अफ़सोश इस बात का है मीडीया जिसको जनता का प्रहरी होना चाहिए वो स्वयं राजनीतिक पार्टियो का मुखौटा बन गया है.
( Posted: Tuesday , October 20, 2009 at 13:37 )
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Pankaj Tiwari Place : ghaziabad |
राहुल गाँधी जो प्रयास कर रहे हैं वो वाकई काबिलेतारीफ है. जो लोग उन्हे नौसीखिया कहतें हैं उन्हे यह जान लेना चाहियें की वह भी कभी ऐसे ही थे. आपने जो example set करने वाली बात कही उसमें भी सच्चाई नज़र आती है क्योंकि आज के समय में राहुल युवाओं के रोल मॉडेल बन गये हैं.
( Posted: Monday , October 19, 2009 at 21:49 )
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Kamlesh Kumar Maurya Place : Noida |
राहुल गाँधी जो आज युवा पीढ़ी के लिए एक आदर्श और उन राजनेताओं के लिए एक नसीहत दे रहे है जो वोट तो गरीब जनता का लेते हैं किन्तु गरीब जनता उनकी नजर में आज़ादी के साठ साल बाद भी एक गुलाम से अधिक कुछ नजर नहीं आती. राहुल गाँधी हो सकता है कि इस हथियार का प्रयोग दलित और पिछडी जाति के आधार पर राजनीती करने वाले नेताओं के काट के रूप में कर रहे हों किन्तु उनका जो भी सलाहकार है वह निश्चित ही भारत के आम नागरिकों की मानसिकता का वेहद सटीक आकलन करने वाला है जिसका ही परिणाम है की आज राहुल की किसी भी गतिविधि को कोई भी राजनेता हलके में लेने की भूल नहीं कर रहा है. हो भी क्यों न अगर हम पुरे देश के राजनीति के सभी बड़े महारथियों का आकलन कर लें तो कांग्रेस में ढेर सारी कमियों के बाद भी राहुल की मंशा पर विश्वास न करने का कोई कारण नजर नहीं आता. जिस व्यक्ति में गरीब आदमी के जीवन के प्रति इतनी संवेदनशीलता हो, जो अपने जीवन की सुरक्षा के परवाह किये वगैर गरीब और दलित की कुटिया में रात गुजारने में न हिचकता हो, जिसे यह स्वीकार करने में जरा भी संकोच नहीं हो कि नेहरु गाँधी परिवार का होने के नाते उन्हें राजनीती में जल्दी पहचान मिली यह उन लोंगो के लिए आज कि राजनीती में कठिन है जिनका कोई राजनीति में नहीं है किन्तु उसके साथ उनका आम इच्छुक युवाओं को राजनीति को अपने करियर के रूप में अपनाने का मौका देने का प्रयास निश्चित सराहनीय है जब राजनीति अमीरों, गुंडों व परिवारवाद से पूरी तरह जकड चुकी है. राहुल देश के लिए एक आशा की किरण हैं क्यों कि हम जैसे पिछडे और गरीब परिवार के लोग जो दलित नेता और पिछडी जाति के नाम राजनीति कर रहे नेताओं कि असलियत जान चुके हैं ऐसी स्थिति में हमारे पास राहुल पर विश्वास करने के सिवा कोई चारा भी नहीं है भले ही वह गरीबों और दलितों के घर जाना किसी राजनितिक सलाहकार के कहने पर कर रहे हों किन्तु इसमें भी हमें कोई आपति नहीं है केवल हमरे लिए संतोष कि एक ही बात है कि देश में जब सभी राजनेता धर्म, छेत्र, भाषा, जाति के नाम पर राजनीति करने कि होड़ मचाये हों तब देश के आम नागरिक को आगे रखने की उनकी सोच देश की युवा पीढ़ी को जरुर प्रोत्साहित करेगी इसमें कोई दो राइ नहीं हैं. मैं तो उन जैसे राजनेता से इतना प्रभावित हूँ कि कांग्रेस को पसंद न करने के बाद भी उनकी पार्टी से केवल इस लिए जुड़ना चाहता हूँ क्यों कि भविष्य में पार्टी राहुल के द्वारा चलायी जायेगी जिनमे हम जैसे गरीबों और पिछडो की अनदेखी नहीं कि जायेगी.
( Posted: Monday , October 19, 2009 at 17:25 )
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pawan upreti Place : Haldwani |
आशुतोष जी की बात कुछ हाड़ तक सही हो सकती हैं की राहुल गाँधी के पास एक नयी सोच है. लेकिन आशुतोष जी अपपको नहीं लगता की आज़ादी के ६२ वर्षों मैं अधिकतर समय सत्ता मैं रही कॉंग्रेस ने देश को ग़रीबी, भुखमैई, बेरोज़गारी उफर मैं दी है. अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के रास्ते पर चल रही यह सरकार जब लोकसभा चुनाव मैं करोरों रुपया फुक्ति हैं और अपने नेताओं की बड़ी रलियान आयोजित करती है उस समय ये राहुल गाँधी इस बात को नहीं कहते की हम सरकारी खजाने का धन उड़कर देश की ग़रीब जनता के पाते पर लात मार रहे हैं. अगर चुनाव लड़ना है तो काम के आधार पर लड़ें. अरबों रुपयें चुनाव मैं फूकते समय राहुल गाँधी को मितवयीयता की याद नहीं आई. देश को बेवकूफ़ बनाने वेल नेताओं की तारीफ आप क्यों कर रहे हैं मुझे समझ नहीं आटा
( Posted: Monday , October 19, 2009 at 15:34 )
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