mohit Place : gold coast |
नमस्कार आशुतोष मैं आपका बहुत जायादा शुक्रिया करना चाहता हू की यहा बैठ कर भी इंटेंेट क दुआरा मुगें अपने देश की सारी जान कारी मिली .मेरा बूस एक सवाल है जब हम जानते है की दाऊद का भारत क समूद्रा में राज है हम उसपे कोई आक्तीओं नही लेते सब जानते हुए भी आँखें क्यो बंद करी हुःाई
( Posted: Monday , December 01, 2008 at 20:25 )
|
आशुतोषजी मुझे गर्व है की मई एक हिंदुस्तानी हूँ. आप सभी ने ता के पास जा कर हमे पल पल की ख़बर दी औ हमरे कमांडो के साथ 59 घंटे लगे रहे. पर ये नेता लोग अब इस पेर पोलिटिक्स कर रहे है अब ड्रामा चल रहा है और ये कभी भी सुधरेंगे नही ये सब देख कर दुख हो रहा है.
( Posted by Arunkumar Mishra on Monday , December 01, 2008 at 23:45 )
|
|
chandrashekhar hada Place : jaipur |
आशुतोष जी , अपने इंडिया मैं - गोरों की ना कालों की यहाँ की पोलिटिक्स है पैसों वालों की.
( Posted: Saturday , November 15, 2008 at 20:26 )
|
|
|
|
सरफराज सैफी Place : दिल्ली |
सर आज की रात ही सब कुछ है...
( Posted: Thursday , November 13, 2008 at 12:05 )
|
|
|
|
kshama singh Place : VARANASI |
आशुतोष जी ,अमरीका मे आई परिवर्तन की बयार कभी भारत में भी आएगी इसका पूरा भरोसा है लेकिन कब तक ये देखना है .इस बयार ने भारत ही नही बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित किया है. हाशिए पे खड़ा व्यक्ति भी अब सपने देखने लगा है और कह रहा है........................ एस वी ...............एस वी............
( Posted: Thursday , November 13, 2008 at 01:54 )
|
|
|
|
Karmu Prasad Place : West Bokaro,GHATOTAND |
आशुतोष जी भारत में भी बदलाव की बयार बह सकती है बशर्ते यहाँ भी null टाइप एक अल्पसंख्यक कला और दलित प्रधानमंत्री हो जो भारत के असली दुख दर्द को समझ सके गोरे नेता तो केवल ग्लैमर व फंतासी के चक्रव्यूह में फ़स देश को बर्बाद कर रहे हैं
( Posted: Monday , November 10, 2008 at 09:40 )
|
|
|
|
Ashish Kumar Gupta Place : Noida |
आशुतोष जी, आपके इस संदेश से मेरा तो यही कहना है की गोरे या काले से क्या होता है. लोगो को ये बात समझनी चाहिए की आदमी अपने कर्म व विचारो से बड़ा होता है ना की अपनी सूरत से. मेरा एक प्रश्न है की ऐसा कौन सा काम है जो गोरे कर सकते है और काले नही कर सकते. आदमी को उसके रंग रूप से नही उसके काम और विचार से पहचानना चाहिए. और आशा करता हू की भविष्य मे लोग किसी को काले और गोरे के रूप मे ना देख कर उसके सोच और विचारो से प्रभावित हो कर फ़ैसला लेंगे. एक बात भारतवासियो से कहना चाहता हू की किसी को जात, पात से देख कर उसके काम का आकलन ना करे. अमेरिका के इस चुनाव से भारत की जनता को एक सबक सीखने की ज़रूरत है. आशा करता हू की भारत व अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ओबांा के संबंध अच्छे होंगे. वैसे तो मैने अभी कुछ ही दीनो से ब्लोग लिखना सुरू किया है. हत्तप://आशीष-कोर्रेस्पोंडेंट/ कृपया मेरे ब्लोग के बारे मे भी कुछ विचार व्यकत करे..! धन्यवाद.....!!
( Posted: Saturday , November 08, 2008 at 13:20 )
|
|
|
|
msbohram Place : jodhpur |
ये एक सच्चे ओर जीवंत लोकतंत्रा का परचम है जो अमेरिका मे लेहरया है भारत अभी हज़ारो मील दूर है एसए लोकतंत्र मे जीने के लिए यहा तो परिवार वाद,जातिवाद,शेत्रवाद,धरमवाद इतना हावी है की केहने को लोकतंत्र है मगर लोकतंत्रा है नही,कुछ मेरे अल्फ़ाज़ यू बया करते है इस पीड़ा को(उम्मीद है आप इसे प्रकाशित करेगे,अगर आप भी कुछ लोकतांत्रिक है तो):-
ये केसा लोकतंत्र है,आती हमको शर्म है, जनता चुनती मगर कहा चुन पति है, वही मिट्टी वही कक़ार,हीरा कहा चुन पति है, बात करे गाँधी,लोकनायक की,रह वोह नही चलते है, मोका आने पर,सबकुछ छोड़,कुर्षी पाने को लपकते है.
ये केसा लोकतंत्र है,आती हमको शर्म है,
उंपढ़ को छोड़ो,पढ़े-लिखे भी कहा स्माज पाए है, जाट-पाट,धर्म,स्वार्थ मे बाते,इनको कहा स्मज पाए है, चेहरे ब्दलते है,वेश ब्दलते है,मगर चाल वही चलते है, स्मज-स्मज कर भी हम,इनको कहा ब्दलते है,
ये केसा.........................
लाभ का पढ़ हो या हो ख़ुद के भत्तो का बिल्ल, कर देते है शानो मे पासस ऊसे ,सभी आपस मे मिल !!! महिला आरक्षण हो या हो सूचना का अधिकार का बिल्ल, अपनी-अपनी सभी चलते है,रेः जाता है बस पासस होने से बिल्ल, बहर दिखे सभी अलग-अलग,अंदर एक-मत हो जाते है, केसे ब्दलते है इनके चेहरे,असली सूरत हम देख न पाते है.
ये केसा लोकतंत्र है................
पेहले से है बत्टे हुए,ये महापुरूष ओर बात ते जाते है, शिक्षा-रोज़गार पर है अधिकार सभी का,आरक्षण ये करवाते है, रिश्ता करो रोटी-बेटी का,फिर जाट-पाट मिट जाए गी, एसा करो पेहले अपने गर से तुम,ये सच्ची करनी केहला एगी, ख़ुद रहे राजा जेसे,रिश्ता करे रजवाड़ो मे, अपनी पर आन पड़े तो,फ़िकवा दे ये इन्हे पिछवाडो मे.
ये केसा.......................................
प्रकर्ती ने दी है व्यवस्त,हम सभी को एक्सार किया, दिए दो-दो हाथ-पाव,आख कान ओर एक दिल,ख़ून सभी का लाल किया, थगने को भोले लोगो को,हिंदू-मुस्लिम-सिख-इशाई मे बात दिया, बात ते बात ते ओर कितना बटेगे हम,क्या हम ने कभी इस पर गोर किया, राजा-रानी हो गये वोः,हम ने एक-दूजे को मार दिया.
ये केसा............................
अदला-बदली करते है कुर्षी की, न आचार है न विचार है,ग़ुलामी है बूस कुर्षी की, आज है मेरी कल तेरी हो जाए गी,परसो फिर मेरी हो जाए गी, जनता देती रहेगी सिर्फ़ वोट,जीत तो बस तेरी-मेरी ही होगी लोकतंत्र है अधिकार तुमःरा ,अब इन कुटिलो को कब स्ंजाओगे, सही चुनो,चुनकर ना भूल जाओ,नही तो बहुत पछताओगे.
ये केसा..............
न जाने कब वो दिन आएगा, उनपध ही नही पढ़ा-लिखा भी स्ंजधार हो जाएगा, नही चलेगा जाट-पाट ओर ध्र्म का खोखला नारा, हर कुटिल चेहरा बेनकाब होकर,कचरे का पत्र हा जाएगा, न मिलेगी कुर्षी जोड़-तोड़ ओर वासवाली से,हाखदर ही हख पाएगा, जनता जाग उठेगी जब,तभी,एक सच्चा लोकतंत्र बन पाएगा
( Posted: Saturday , November 08, 2008 at 09:17 )
|
|
|
|
aniruddha yadav Place : delhi |
बिल्कुल होगा ये. आगाज़ हो चुका है. सदियों पुराने बंधन टूटने में वक़्त तो लगता ही है. हिंदुस्तान में भी लोगों को समझ में आने लगा है. वैसे अमेरिका और भारत में बड़ा फ़र्क है, एजुकेशन का. हक़ीकत में डेमोक्रेसी पढ़े -लिखे लोगों की चीज़ है. इसे अमेरिका ने साबित कर दिया है. हमको भी ये समझना होगा. फिर भी बदलाव दूर नहीं. आपकी सोच को सलाम........!
( Posted: Friday , November 07, 2008 at 21:31 )
|
|
|
|
tpod Place : mera bharat mahan |
"फिर चुपके से अपने से बोला जब ये रात अमेरिका में आयी है तो हिंदुस्तान तक भी आयेगी" ----आप की अभिलाशा पूरी हो यह मेरी शुभकामना है. लेकिन हिंदुस्तान में प्रगती उलटी हो रही है. आज़ादी के बाद से देख लीजिए- जिस तरह के नेतागन थे क्या उस तुलना में हम उनके इर्द-गिर्द भी हैं. भ्रष्टाचार दिन दूना तथा रात चौगुना बढ़ता गया . अमीर और अमीर होते गये तथा ग़रीब और ग़रीब होते गये. दंगे-फ़साद और बढ़ते गये. हत्या-ब्लातकार और बढ़ते गया. क़ानून के शासन से जनता का विश्वास गिरता गया. गाँधी जी सदा के लिए ताक पर रख दिए गये उन्ही की माला जपने वालों द्वारा. नेहरू जी के वाद को उनके ही अनुयायियों ने सदा के लिए अलविदा कह दिया. धर्म-भाषा-जाती-प्रांत के आधार पर भेद-भाव और बढ़ता गया या यूँ कहिय विकराल हो गया है. आतंकवाद भी समाजवाद या अन्य वाद की तरह एक वाद बन गया है. जहाँ आज भी हरिजनों को मंदिर-प्रवेश से मनाही है.
ये सारी बातें मैने आपके दर्द को बढ़ाने लिए नहीं बल्कि अपने ख़ुद के म न को हलका करने के उद्देश्य से लिखीं.
तकनीकी तौर पर हमारे देश ने तो अमेरिका को बहुत पहले ही पीछे छोड़ चुका है. जहाँ के राष्ट्रपति पद पर एक हरिजन शोभायमान हो चुका है. एक प्रांत की मुख्यमंत्री भी हिंदुस्तान ने दलित वर्ग से दी है जो एक महिला भी है. अनेकों केंद्रीय मंत्री भी दे चुका है अपना हिंदुस्तान यहाँ के पिछड़े तबकों से. पर दिमाग़ी तौर पर हम और पीछे चले गये है, अमेरीकी लोकतंत्र की व्यापकता से हम बहुत दूर हैं
आज की परिस्थितियाँ देखकर तो मैं आशावादी होने से भी शंकित हूँ की अपना हिंदुस्तान कभी वह रात देख भी पाएगा जिसका सपना आप देख रहे हैं.
( Posted: Friday , November 07, 2008 at 17:16 )
|
|
|
|
Jitendra Place : Bangalore |
आपने बिल्कुल सही कहा आशुतोष जी. अगर आज अमेरिका में येह दिन आया है तोह एक दिन हमारे भारत मे भी आएगा. जल्द ही आएगा. हम सबको उसी दिन का इंतेज़ार रहेगा. आइए हम सब मिलकर आज ये संकल्प लें की हम अपने देश को इस दिशा में लेकर चलेंगे. धन्यवाद!!
( Posted: Friday , November 07, 2008 at 16:59 )
|
|
|
|