सोमवार, जून 16, 2008 09:56s

यकीन मानिए, कोई यकीन नहीं करेगा

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भला आप ही बताएं ,अगर मैं आपसे ही पूछूं कि सीबीआई अगर आपके सामने डॉ तलवार को ले लाए और कहे कि यह हैं आरुषि का कातिल, तो क्या आप यकीन करेंगे।

वैसे अगर सीबीआई यह कहे कि कृष्णा और उसके साथियों ने मिलकर किया आरुषि का कत्ल तो भी लोग यकीन नहीं करेंगें। दोनों ही परिस्थितियों में लोगों की अपनी दलीलें होगीं।

अगर आरुषि के कातिल के तौर पर उसके पिता डाक्टर तलवार का नाम लिया जाए तो लोग कहेंगे कि भला कोई बाप ऐसा कैसे कर सकता है। दूसरी दलील होगी कि अगर तलवार आरुषि के कत्ल की साजिश रचते तो कम से कम वो अपने घर में आरुषि को नहीं मारते क्योंकि ऐसा करने के उनके पास और भी कई रास्ते थे।

भला कोई कातिल ऐसा क्यों चाहेगा कि वो अपने ही घर में कत्ल करे और पकड़ा जाए। अगर किसी बाप को प्लानिंग करके ही अपनी बेटी को मरवाना होता तो डॉ तलवार जैसे किसी भी पिता के पास इतने पैसे हैं कि बेटी भी मर जाएगी और किसी को पता तक नहीं चलेगा।

ऐसे में यकीनन पहली बार में न तो दिल और न ही दिमाग इसपर यकीन करता है और अब बात करते हैं कृष्णा की , वो शख्स जिसके बारे में माना जा रहा है कि उसीने किया है आरुषि का कत्ल, लेकिन यहां भी एक पेच हैं।

अगर आरुषि के कातिल के तौर पर कृष्णा का नाम सामने आता है तो भी लोग इसे नहीं मानेगें क्योंकि तब दलील ये होगी कि सीबीआई एक गरीब को फंसा रही है। कहा जाएगा कि डॉक्टर तलवार को बचा लिया गया।

क्योंकि सीबीआई को किसी भी कीमत पर इस मामले को अंजाम तक पहुंचाना है और क्योंकि कृष्णा सॉफ्ट टार्गेट है इसलिए उसे फंसा दिया गया। इतना ही नहीं अगर तफ्तीश में दोनों को कत्ल का आरोपी पाया गया तो भी सवाल उठेंगे कि कुछ और लोग शामिल रहे होंगे जिन्हें छोड़ दिया गया।

दूसरे शब्दों में कहें तो हिंदुस्तान की ये सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री आरुषि हत्याकांड ,रहस्य का एक ऐसा चक्रव्यूह बन गया है कि आप चाहे जिस तरफ से देखिए। सवाल हर तरफ नजर आएंगे।

जाहिर है ऐसे में आपके मन में भी एक सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ये नौबत ही क्यों और कैसे आई कि बतौर कातिल किसी का भी नाम सामने आए ,लोगों को यकीन नहीं होगा।

दरअसल इसकी सबसे बडी वजह रही नोएडा पुलिस। जिस तरीके से नोएडा पुलिस को तफ्तीश करनी चाहिए थी ,उस तरीके से तफ्तीश करना तो दूर ,वो जांच के बेसिक कायदे भी भूल गई।

अब वो भूल गई या उसने जानबूझकर उसे भुला दिया इन सब बातों पर बहस हो सकती है लेकिन फिलहाल इतना सच है कि जांच के नाम पर उसने ऐसा माहौल तैयार कर दिया कि लोगों को, आरुषि के घर में रहने वाला हर शख्स यहां तक उसके नौकर, उसके रिश्तेदारों और डॉ तलवार के दोस्तों तक में आरुषि का कातिल नजर आने लगा।

जितने मुंह उतनी बातें -हर कोई अपने अपने तरीके से आरुषि से जुडे लोगों में कातिल की तलाश कर रहा है। हालांकि कुछ दिन बाद आरुषि के कत्ल के आरोप में डॉ तलवार गिरफ्तार हुए लेकिन तब तक जांच पर से लोगों का भरोसा उठ चुका था।

खैर इस मामले पर जब नोएडा पुलिस की खूब भद पिटी तो मामला सीबीआई को चला गया। अब जांच सीबीआई के हाथ में है लेकिन सीबीआई ने भी कुछ ऐसे गुल खिलाए कि उसकी तफ्तीश के भी हर कदम पर सवाल उठने लगे।

मसलन भले ही उसने कृष्णा को आरुषि के कत्ल के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया है लेकिन अभी तक उसने ये नहीं बताया है कि अगर कृष्णा कातिल है या फिर वो किसी तरह से आरुषि के कत्ल में शामिल था ,तो उसका मकसद क्या था।

क्योंकि क्राइम का पहला सबक ये है कि बिना मकसद के कोई साजिश नहीं रची जाती, हालांकि अभी कहने को बहुत कुछ है लेकिन अभी तो मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि अगर कृष्णा कातिल है तो सीबीआई को कत्ल की ठोस वजह भी बतानी होगी।

वो वजह, जिसपर लोग यकीन कर सकें। ऐसे में अगर कातिल आरुषि के पिता डॉ राजेश तलवार हैं तो भी उनका मकसद सीबीआई को साफ-तौर बताना होगा और इस काम में अगर सीबीआई जरा सी भी ढीली पडती है तो बतौर कातिल किसी का भी नाम सामने आए लेकिन .....यकीन मानिए ,कोई यकीन नहीं करेगा।

पोस्टेड बृज दुग्गल at 09:56s     4 कमेंट्स

टोटल कमेंट्स

पोस्टेड बी jeetandra

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पोस्टेड बी anil bansal

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पोस्टेड बी बृज दुग्गल

शुक्रिया ....आपकी बात बिल्कुल सही है ...इस मर्डर मिस्ट्री में इतने मोड़ आए कि अगर सीबीआई जलते तवे पर बैठकर भी कहेगी कि कातिल फलां है तो भी लोग यकीन नहीं करेंगे । बृज दुग्गल ...

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पोस्टेड बी Swati

आह , आप भी वही कह रहे हैं जो हमारे दिमाग़ में घूम रही है. कल के समाचारो में दुर्रानी के नौकर राजकुमार का भी नाम आ गया है और सी बी आई की माने तो येह ज़ोर ज़बरजास्ती का मामला हो सकता है. एक तरफ़ सी बी आई कहती है के कृष्णा और राजकुमार ने अपना जुर्म क़बूल किया है, दूसरी तरफ़ उनके पास कोई सबूत नही. सास बहू के सेरियल से उभर चुके भारतीय शायद इस घटना में भी सनसनी की तलाश कर रही है. सवाल जीतने हैं , अगर एक का भी जवाब मिल जाए तो शायद क़ातिल का मक़सद भी समझ आए. अगर कृष्णा औ राजकुमार क़ातिल है तो भी मैं ऐसे मा-बाप को गुनहगार मानती हू जिनके कमरे में सोते वक़्त उनकी बेटी का क़त्ल हो जाता है.मुंबई से - ...

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