शुक्रवार, जुलाई 11, 2008 18:07s

होशियार सीबीआई और बेवकूफ हम

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आरुषि का कत्ल और कत्ल के बाद के 57 दिन। पिछले 57 दिनों से लगातार हम आपको आरुषि के बारे में बता रहे हैं लेकिन आज सबसे पहले हम आपसे एक सवाल पूछना चाहते हैं। क्या ये मुमकिन है कि एक कमरे में आपकी बेटी का कत्ल हो रहा हो और आप दूसरे कमरे में आप सोए रहें? आपको क्यों नहीं पता चला इसकी दलील ये दी जाए कि कमरे में चल रहे एसी की आवाज इतनी तेज थी कि आपको अपनी ही बेटी की चीख सुनाई नहीं दी। रुकिए... जवाब देने की जल्दबाजी मत कीजिए... एक और सवाल... क्या ये मुमकिन है कि आपकी बेटी को कत्ल कर घर से जा चुके कातिल फिर लौट आएं और अबकि बार वो बेसुध पड़ी उस मासूम पर फिर से वार करें। यानी आप सोते रहें और वो बडे ही इत्मीनान से आपकी बेटी पर दो-दो बार वार करें। भला कौन यकीन...

पोस्टेड बृज दुग्गल at 18:07 PM     14 कमेंट्स

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