मंगलवार, मई 20, 2008 18:20s

ये गुनाह तो नहीं ?

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पिछले दस साल से मैं पत्रकारिता मैं हूं और कुछ साल पहले तक कभी मुझे इस सवाल ने परेशान नहीं किया कि मैं क्राइम कवर करता हूं ,क्राइम का प्रोग्राम बनाता हूं। लेकिन पिछले कुछ साल से ये सवाल लगातार मुझे मथ रहा है। बार बार ये सवाल मुझे विचलित करता है कि क्या क्राइम पत्रकारिता गुनाह है? लोगों को गुनाहगारों से होशियार करना गुनाह है? वैसे ये वो सवाल है जिसका जवाब देना जितना आसान दिखता है, दरअसल वो उतना ही मुशकिल है। हमारी इंडस्ट्री के कुछ पत्रकारों का मत है कि पत्रकारिता में क्राइम प्रोग्राम नहीं होना चाहिए। कुछ बुद्दिजीवी भी इसी राय के हैं कि किसी भी न्यूज़ चैनल को अपराध क्रार्यक्रम नहीं दिखाना चाहिए। इसके समर्थन में वो विभिन्न तर्क देते हैं। कभी कहा जाता है क्राइम प्रोग्राम को मिर्च मसाला लगाकर दिखाया जाता है तो कभी कहा है जाता है कि ऐसे...

पोस्टेड बृज दुग्गल at 18:20 PM     7 कमेंट्स

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